गंगटोक : सिक्किम के वन सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से बुलबुले स्थित वन प्रशिक्षण संस्थान (एफटीआई) में बुधवार से तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में राज्य के सभी छह जिलों की ईको-डेवलपमेंट कमेटियों (ईडीसी) के नामित सदस्य भाग ले रहे हैं।
यह प्रशिक्षण केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फॉरेस्ट्री प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण योजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन सिक्किम सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उदय गुरुंग ने किया। उद्घाटन समारोह में एफटीआई निदेशक छिरिंग पिंछो भूटिया, संयुक्त निदेशक तेंजिंग नोरबू भूटिया, उप निदेशक अनुप बनिया, संस्थान के कर्मचारी और विभिन्न क्षेत्रों से आए सामुदायिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
उदय गुरुंग ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित कर ही मनुष्यों तथा वन्यजीवों के बीच सुरक्षित और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सकता है। बताया गया है कि पांच से सात अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को वन्यजीवों के व्यवहार, संघर्ष के कारणों, फसल और पशुधन की सुरक्षा तथा आपात परिस्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी व्याख्यान देने के साथ ही आत्मविश्वास बढ़ाने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फामबोंग लो वन्यजीव अभयारण्य और बुलबुले स्थित हिमालयन जूलॉजिकल पार्क में क्षेत्रीय भ्रमण कराया जाएगा। वहां उन्हें जमीनी परिस्थितियों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के व्यावहारिक तरीके समझाए जाएंगे। वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, उनका उद्देश्य ईडीसी सदस्यों को प्रशिक्षित कर स्थानीय स्तर पर सामुदायिक प्रथम सहायता समूह तैयार करना है, ताकि वन सीमावर्ती क्षेत्रों में फसलों की क्षति, पशुधन के नुकसान और लोगों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।
No Comments: