सिक्किम ‘पेपरलेस न्यायपालिका’ घोषित

तकनीक एवं न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन

गंगटोक : गंगटोक के सम्मान भवन में आज आयोजित तकनीक एवं न्यायिक शिक्षा पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन के दूसरे सत्र में सिक्किम को ‘पेपरलेस न्यायपालिका’ घोषित किया गया।

सिक्किम उच्च न्यायालय के तत्वावधान में सिक्किम न्यायिक अकादमी द्वारा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के सहयोग आयोजित इस कार्यक्रम के पहले तकनीकी की अध्यक्षता सेशेल्स के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोनी जेम्स गोविंदेन ने की। उनके साथ, श्रीलंका के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएचएमडी नवाज और भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस सत्र का विषय “पाठ्यक्रम का वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय कानून” था।

सत्र में वाणिज्य, साइबर अपराध, पर्यावरण कानून और मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में सीमा-पार कानूनी मुद्दों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया गया। यहां चर्चा किए गए प्रमुख चुनौतियों में अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का प्रवर्तन, वैश्विक संधियों द्वारा नियंत्रित साइबर खतरों का उदय और सीमा-पार दायित्व जैसे सिद्धांतों द्वारा निर्देशित पर्यावरणीय चिंताएं शामिल थीं।

इसके अलावा, सत्र में सामंजस्यपूर्ण कानूनी शिक्षा और अधिक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया, विशेष रूप से उन कॉमनवेल्थ देशों के बीच जो समान कानून परंपराओं को साझा करते हैं। इसके पैनल में दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह, तेलंगाना उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मौशुमी भट्टाचार्य और यूपीएसए लॉ स्कूल के डीन तथा सीएलईए के कार्यकारी सदस्य प्रो ई कोफी अबोत्सी (ऑनलाइन) शामिल थे। इस सत्र का संचालन बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेशन, सीएलईए महासचिव और यूनाइटेड किंगडम के ससेक्स विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र में ‘बिजनेस एंड ह्यूमैनिटीज’ की प्रमुख मीरा फर्टाडो ने किया।

वहीं, कार्यक्रम के दूसरे सत्र की अध्यक्षता त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव और सह-अध्यक्षता तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी सैम कोशी ने की। “न्यायिक शिक्षा में डिजिटल चुनौतियां: राष्ट्रमंडल में सहयोग” शीर्षक वाले इस सत्र में कई मुख्य विषयों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें तकनीकी बुनियादी ढांचे में असमानताएं, साझा डिजिटल भंडार एवं शिक्षण मंचों की आवश्यकता, न्यायिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, अदालतों में प्रौद्योगिकी के उपयोग को नियंत्रित करने वाले नैतिक ढांचे और अन्य शामिल रहे।

इस पैनल में कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीके सिंह, केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति कौसर एडापगाथ, यूके के बैरिस्टर-एट-लॉ तथा राष्ट्रमंडल कानूनी शिक्षा संघ के कार्यकारी सदस्य बैरिस्टर प्रशांत बरुआ और यूरोपीय कानून एवं सुधार की प्रोफेसर (ऑनलाइन) प्रोफेसर स्टेफनी लॉल्हे शालू शामिल थे। इस सत्र का संचालन केरल उच्च न्यायालय की न्यायाधीश श्रीमती न्यायमूर्ति शोभा अन्नामा ईपेन ने सीएलईए एशिया के उपाध्यक्ष डॉ गिरी शंकर एसएस के साथ मिलकर किया। चर्चा में शामिल डॉ रुचि शर्मा (सीएलईए की संयुक्त महासचिव) ने सत्र का समापन करते हुए इसके मुख्य परिणामों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

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