गंगटोक : सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने कहा है कि सिक्किम आज सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी प्रगति का राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है। उन्होंने यह बात राज्य के 51वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को संबोधित करते हुए कही।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 1975 में भारत के साथ सिक्किम का विलय यहां के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक था, जिसने संवैधानिक शासन, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव रखी। राज्यपाल ने कहा कि सिक्किम देश का पहला पूर्ण जैविक राज्य होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित कर पूरी दुनिया के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

उन्होंने जैविक खेती, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में राज्य सरकार की पहलों की सराहना की। मेरो रुख मेरो सन्तति और शिशु समृद्धि योजना जैसी योजनाओं को उन्होंने पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक कल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। राज्यपाल ने वर्ष 2023 की विनाशकारी फ्लैश फ्लड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि पुनर्वास सहायता के तहत चुंगथांग गांव को गोद लिया गया है तथा वहां युवाओं के कल्याण और आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने के लिए बहुउद्देश्यीय जिम्नेजियम हॉल का निर्माण किया गया है।
राज्यपाल ने सिक्किम के सामरिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन, नेपाल और भूटान की सीमाओं से जुड़े इस राज्य में भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों के सहयोग से सीमा अवसंरचना तथा पर्यटन को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम और भारत रणभूमि दर्शन जैसी पहलों के माध्यम से सीमावर्ती गांवों को अब देश का अंतिम गांव नहीं, बल्कि पहला गांव माना जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य में उद्यमिता, एमएसएमई और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी योजनाओं और नीतिगत सुधारों से युवाओं और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता और स्थानीय उद्योग मजबूत हो रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा, आमा सशक्तिकरण योजना और आमा सहयोग योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक कल्याण में सुधार हुआ है। एलपीजी रिफिल सहायता योजना से ग्रामीण महिलाओं की पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हुई है तथा स्वास्थ्य स्थितियों में भी सुधार आया है। राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद से सिक्किम ने स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति की है। ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, मातृ स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा रिग्पा जैसी आयुष पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़कर सिक्किम को समग्र स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, स्टेम शिक्षा और उच्च शिक्षा सुधारों पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि भविष्य उन्मुख संस्थानों का निर्माण किया जा सके।
राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन, ग्रामीण विकास, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और मेगा होमस्टे योजना जैसी पहलें राज्य में सतत विकास और रोजगार सृजन को नई दिशा दे रही हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने राज्यवासियों से शांति, एकता, करुणा और धैर्य के मूल्यों को बनाए रखते हुए हरित, स्वस्थ और समृद्ध सिक्किम के निर्माण में मिलकर योगदान देने का आह्वान किया।
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