गंगटोक : सिक्किम हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से गठित समिति को निर्देश दिया है कि गंगटोक के बुर्तुक स्थित सिक्किम गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के नियमों के अनुसार आवश्यक बुनियादी ढांचागत सुविधाएं जल्द सुनिश्चित की जाएं।
यह निर्देश अदालत द्वारा गठित तथ्य-जांच समिति (फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी) की रिपोर्ट के बाद दिया गया है जिसमें कॉलेज में कई आवश्यक सुविधाओं की कमी बताई गई है। अदालत ने यह भी कहा कि इनमें से कुछ कमियां इतनी गंभीर हैं कि कॉलेज को बीसीआई से मिली मान्यता पर भी असर पड़ सकता है।
इससे पहले, 22 सितंबर को मामले की स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सिक्किम बार एसोसिएशन के पांच सदस्यों की एक तथ्य-जांच समिति गठित की थी। समिति को कॉलेज भवन की जर्जर स्थिति, भवन की संरचनात्मक मजबूती, बीसीआई के मानकों के अनुरूप पुस्तकालय की व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं की जांच का जिम्मा दिया गया था।
समिति को मूट कोर्ट हॉल, सभागार, छात्रावास, पर्याप्त शौचालय तथा खेल सुविधाओं की उपलब्धता की भी जांच करनी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं को अपर्याप्त बताया। 29 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ए मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने राज्य शिक्षा विभाग की तकनीकी निगरानी एवं समन्वय समिति को तथ्य-जांच समिति की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कानूनी स्मरण अधिकारी सह कानून सचिव, तथ्य-जांच समिति के संयोजक तथा उनकी पसंद के एक सदस्य और कॉलेज के प्राचार्य द्वारा नामित एक छात्र प्रतिनिधि को भी तकनीकी निगरानी एवं समन्वय समिति में शामिल करने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने समिति के अध्यक्ष को आदेश की प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर बैठक बुलाने और बीसीआई नियमों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। तथ्य-जांच समिति के संयोजक को बैठक में बीसीआई नियमों के तहत लॉ कॉलेज के लिए जरूरी सुविधाओं और मानकों की जानकारी रखने को कहा गया है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैठक के निष्कर्ष के आधार पर राज्य सरकार आवश्यक कदम बिना किसी और देरी के उठाए।
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