गेजिंग : लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण गेजिंग जिले के अधिकांश क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित होता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से मिली शिकायतों के अनुसार योक्सम, ताशीडिंग, देन्ताम तथा गेजिंग-बर्मेक क्षेत्र के आसपास भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाओं के कारण लोगों को दैनिक आवागमन में भारी परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकारी कर्मचारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी तथा किसान सभी के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण बन गया है। दिन-प्रतिदिन सड़कों की स्थिति खराब होती जा रही है, जिससे स्थानीय कृषक, छात्र-छात्राएं और यात्री सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। गेजिंग-बर्मेक निर्वाचन क्षेत्र के रूंगदू-वर्थांग गांव का सड़क संपर्क पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बाधित है। लेक्शेप से बर्मेक जाने वाले सड़क मार्ग पर फेंगखोला स्थित वर्थांग के आले के निकट सड़क भूस्खलन के कारण बंद है।
स्थानीय लोगों ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क बंद हुए तीन दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि रूंगदू-वर्थांग क्षेत्र में इस दौरान कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए और उसे अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़े, तो सड़क बंद होने के कारण समय पर उपचार नहीं मिल सकेगा। ऐसी स्थिति में मरीज के उपचार से वंचित रह जाने और बिस्तर पर ही दम तोड़ देने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की कार्पेटिंग एवं मरम्मत की मांग उठाने पर प्रायः यह जवाब दिया जाता है कि मानसून समाप्त होने के बाद स्थायी मरम्मत कार्य किया जाएगा। उनका मानना है कि मानसून के दौरान स्थायी निर्माण कार्य तकनीकी रूप से कठिन अवश्य होता है, लेकिन जोखिम वाले स्थानों पर अस्थायी सुरक्षा उपाय, सड़कों की मुख्य नालियों की नियमित सफाई, जल निकासी की समुचित व्यवस्था, लगातार निगरानी तथा त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभागों, जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर बंद सड़कों को शीघ्र चालू कराने, जोखिम वाले विद्यालयों एवं बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानसून के बाद दीर्घकालिक सड़क सुदृढ़ीकरण योजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए समय पर तैयारी, नियमित सड़क मरम्मत, प्रभावी आपदा प्रबंधन तथा संबंधित सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय ही दीर्घकालिक समाधान का आधार बन सकता है।
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