गोरखालैंड रोडमैप पर महेंद्र पी. लामा की सफाई, ‘सिक्किम को शामिल करने की मंशा नहीं’

गंगटोक : गोरखालैंड मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए चर्चित रोडमैप तैयार करने वाले शिक्षाविद् प्रो महेंद्र पी. लामा ने स्पष्ट किया है कि उनके प्रस्ताव में सिक्किम के किसी भी भूभाग को शामिल करने की मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस प्रावधान को लेकर सिक्किम में विवाद खड़ा हुआ, उसे केंद्र सरकार को सौंपे गए अंतिम दस्तावेज से हटा दिया गया है।

प्रो. लामा ने 14 सितंबर 2026 को जारी अपने स्पष्टीकरण में जुलाई में सामने आए अपने चर्चा-पत्र ‘स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए रोड मैप : 4 विकल्प/रास्ते’ को लेकर उठी आशंकाओं का जवाब दिया। उल्लेखनीय है कि जुलाई के मसौदे में चौथे विकल्प के तहत ‘उत्तर बंगाल को राज्य तथा/या पड़ोसी राज्यों के सटे हुए क्षेत्रों के साथ’ जोड़ने का उल्लेख था। इसी शब्दावली के बाद सिक्किम में चिंता बढ़ी थी। सिक्किम भूटिया लेप्चा एपेक्स कमेटी के संयोजक छितेन ताशी भूटिया ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से इस प्रस्ताव के सिक्किम की क्षेत्रीय अखंडता पर संभावित प्रभाव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।

इस बीच, प्रस्ताव के साथ कथित नक्शा प्रसारित होने की खबरों ने भी विवाद को बढ़ाया। हालांकि, प्रो लामा ने कहा कि जुलाई में दार्जिलिंग के नागरिक समाज संगठनों के बीच जब यह नोट साझा किया गया था, तब उसके साथ कोई नक्शा संलग्न नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘पड़ोसी राज्यों के सटे हुए क्षेत्रों’ से उनका आशय बिहार, झारखंड, असम और मेघालय जैसे राज्यों से था, सिक्किम से नहीं।

प्रो. लामा ने कहा कि सिक्किम को तोड़ने या उसके भूभाग में किसी तरह की छेड़छाड़ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने सिक्किम सरकार के साथ अपनी सलाहकार भूमिका को भी गोरखालैंड आंदोलन में अपनी राजनीतिक भागीदारी से अलग बताते हुए इसे पूरी तरह पेशेवर दायित्व करार दिया। सबसे महत्वपूर्ण रूप से उन्होंने बताया कि विवाद पैदा करने वाला चौथा विकल्प अगस्त 2026 में भारत सरकार को सौंपे गए अंतिम प्रस्ताव में शामिल ही नहीं किया गया।

उनके अनुसार अंतिम दस्तावेज में केवल तीन विकल्प रखे गए हैं-पूर्ण गोरखालैंड राज्य का गठन, केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा तथा मेघालय के 1969 के मॉडल पर ‘राज्य के भीतर राज्य’ जैसी स्वायत्त व्यवस्था। वहीं, प्रो लामा ने अपने बयान में सिक्किम की सिटीजन्स एक्शन पार्टी (सीएपी) के अध्यक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मसौदे से गलत और गैर-जिम्मेदार निष्कर्ष निकाले गए तथा राजनीतिक लाभ के लिए गोरखालैंड की मांग को कमजोर करने की कोशिश की गई।

हालांकि इस स्पष्टीकरण से सिक्किम भूटिया लेप्चा एपेक्स कमेटी द्वारा उठाई गई सिक्किम की क्षेत्रीय अखंडता संबंधी मुख्य चिंता का जवाब सामने आया है, लेकिन कमेटी द्वारा उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर प्रो लामा ने कुछ नहीं कहा। यह मुद्दा 7 सितंबर को दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट कॉन्स्टिट्यूशनल राइट पीपुल्स फोरम द्वारा प्रस्तावित नए अनुच्छेद 371-के और दार्जिलिंग के लिए स्वायत्त प्राधिकरण की मांग से जुड़ा है। बहरहाल, प्रो लामा का यह बयान सिक्किम सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता। सिक्किम भूटिया लेप्चा एपेक्स कमेटी ने इस मामले में राज्य सरकार तथा सिक्किम विधानसभा से औपचारिक प्रस्ताव पारित कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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