गृहिणी सुष्मिता राई जीती ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’

गंगटोक : उत्तराखंड में 16 से 20 अप्रैल तक आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ के महिला वर्ग में सिक्किम की 43 साल की एक गृहिणी सुष्मिता राई ने पहला स्थान हासिल किया है। यह ऊंचाई पर होने वाली 113 किलोमीटर लंबी एक सहनशक्ति दौड़ थी जिसका आयोजन भारतीय सेना द्वारा उत्तराखंड पर्यटन के सहयोग से किया गया था।

20 अप्रैल को प्रतियोगिता के समापन समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान भारतीय सेना के अधिकारियों ने सुष्मिता राई को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया। उनकी यह उपलब्धि सिक्किम राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलद्ब्रिध मानी जा रही है। साथ ही, यह उपलब्धि पूर्वोत्तर भारत में सहनशक्ति वाले खेलों में बढ़ती भागीदारी को भी उजागर करती है।

जानकारी के अनुसार, कई चरणों वाली इस दौड़ प्रतियोगिता में तीन दिनों में 113 किलोमीटर की दूरी तय की गई। यह दौड़ चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों के चुनौतीपूर्ण हिमालयी इलाकों से होकर गुजरी जिसमें प्रतिभागियों को रास्ते में खड़ी चढ़ाइयां, पथरीले रास्ते और ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरना पड़ा। ऐसे में, इसने प्रतिभागियों की सहनशक्ति और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता की कड़ी परीक्षा ली।

दो बच्चों की मां और बसंत राई की पत्नी सुष्मिता राई ने अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश भर से आए प्रशिक्षित धावकों के साथ मुकाबला किया। उन्होंने कुल 20 घंटे, 31 मिनट और 59 सेकंड में यह दूरी तय की और सभी चरणों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए महिला वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

17 अप्रैल हेलंग से शुरू हुई यह दौड़ कल्पेश्वर मंदिर के पास उरगम घाटी में कलकोट तक पहुंची। दूसरे दिन, 18 अप्रैल को प्रतिभागियों ने कलकोट से मंडल तक दौड़ लगाई, जो रुद्रनाथ मंदिर और पनार बुग्याल से होकर गुजरी। 19 अप्रैल को अंतिम चरण में मंडल से उखीमठ तक का रास्ता तय किया गया। यह रास्ता तुंगनाथ और चंद्रशिला से होकर गुजरा, जो अपनी ऊंचाई और कठिन भूभाग के लिए जाना जाता हैं।

उल्लेखनीय है कि ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज’ केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के अनुरूप है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालय के दूरदराज के इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय संस्कृति व पारंपरिक रास्तों को दुनिया के सामने लाना है। साथ ही, इसका एक और उद्देश्य ऊंचाई पर खेले जाने वाले खेलों को प्रोत्साहित करना और साथ ही स्थानीय समुदायों को सहयोग देना भी है।

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