सिक्किम की बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, विशेषज्ञ समिति के पुनर्गठन का निर्देश

गंगटोक : सिक्किम में सड़कों की लगातार बिगड़ती स्थिति, भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सिक्किम उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की विशेषज्ञ समिति का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने समिति में राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम (एनएचपीसी), इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड, पहाड़ी सडक़ निर्माण विशेषज्ञ आशीष डी. घरपुरे तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी के विशेषज्ञों को शामिल करने को कहा है। समिति हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ सड़क निर्माण का ढांचा तैयार करेगी।

गत 24 सितंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व निर्देश के अनुसार विशेषज्ञ समिति गठित कर दी गई है, जिसे छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। मुख्य न्यायाधीश ए मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान समिति में अतिरिक्त विशेषज्ञों और निर्माण एजेंसियों को शामिल करने की आवश्यकता जताई। न्यायमित्र ताशी राप्तेन बारफुंगपा ने अदालत को बताया कि मेघालय उच्च न्यायालय में लंबित इसी प्रकार के मामले में पहाड़ी सडक़ विशेषज्ञ आशीष डी घरपुरे और आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है।

इस पर खंडपीठ ने सिक्किम के मुख्य सचिव को घरपुरे और आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञों को समिति में शामिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य में जलविद्युत परियोजनाओं पर काम कर रही एनएचपीसी तथा रेलवे निर्माण कार्यों से जुड़ी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की भागीदारी भी आवश्यक बताई। इससे पहले 8 सितंबर की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ), राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल), संबंधित सरकारी विभागों और भूगर्भीय, भू-तकनीकी तथा अभियंत्रण विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा था कि सिक्किम में यात्रा के दौरान जगह-जगह सड़कों का क्षतिग्रस्त होना, भूस्खलन, सड़क धंसने और पहाड़ी ढलानों के टूटने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी घटनाओं को देखते हुए यह जांचना जरूरी है कि सड़क निर्माण की वर्तमान योजना, डिजाइन और कार्यप्रणाली में हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय, भूकंपीय, जलविज्ञान संबंधी और जलवायु परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान रखा जा रहा है या नहीं।

विशेषज्ञ समिति को अपनी रिपोर्ट में सड़क निर्माण के मौजूदा तकनीकी मानकों, जल निकासी व्यवस्था, भूस्खलन और कटाव रोकने के उपायों तथा ढलानों की सुरक्षा संबंधी निर्माण पद्धतियों का विस्तृत आकलन करना होगा। इसके साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच और स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा निरीक्षण की वर्तमान व्यवस्था की भी समीक्षा करनी होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति को यह निर्धारित करना होगा कि सिक्किम में सडक़ों की मौजूदा समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जाए और भविष्य में सडक़ निर्माण के लिए कौन से तकनीकी मानक अपनाए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को निर्धारित की गई है।

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