गंगटोक : डीसी रोहन अगवाने की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) गंगटोक की ओर से जिला स्तरीय मानसून पूर्व तैयारी बैठक का आयोजन जिला परिषद भवन के सम्मेलन कक्ष में किया गया। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए डीसी सह अध्यक्ष, डीडीएमए (गंगटोक) रोहन अगवाने ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में खराब जल निकासी व्यवस्था तथा जल प्रबंधन में लापरवाही पर्यावरणीय क्षति के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक वर्षा हो रही है, जिससे जल निकासी प्रणाली और जल संग्रहण स्थल प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था इतनी तीव्र वर्षा को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मजबूत एवं आपदा-रोधी आधारभूत संरचना के विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंगटोक के अधिकांश प्रमुख शहरी क्षेत्र तीव्र पहाड़ी ढलानों और रिज क्षेत्रों में बसे हुए हैं, न कि समतल घाटियों में। इस कारण ये क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। उन्होंने सड़क किनारे नालियों, झोरों तथा पीएचई पाइप लाइनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई, क्योंकि ये अक्सर जल निकासी मार्गों में अवरोध उत्पन्न करते हैं।
रोहन अगवाने ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत डीडीएमए को जोखिम प्रबंधन से जुड़े विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है। निर्देशों की अवहेलना होने पर अधिनियम की धारा 51 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी है। उन्होंने जानकारी दी कि जिले में एक विशेष आपदा प्रबंधन टीम गठित की जाएगी, जिसका नेतृत्व आपदा प्रबंधन समन्वयक करेंगे। इसके अंतर्गत आपदा प्रबंधन पर्यवेक्षक एवं सहायक नियुक्त किए जाएंगे, जो पूरे जिले का सर्वेक्षण कर संवेदनशील स्थलों की पहचान करेंगे। साथ ही जिले में उपलब्ध आपदा प्रबंधन से संबंधित मशीनरी, उपकरण एवं संसाधनों की सूची भी तैयार की जाएगी।
अपने संबोधन में एसपी महेंद्र सुब्बा ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान सभी विभागों के बीच सक्रिय समन्वय और सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जिम्मेदार अग्रिम पंक्ति कर्मियों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि आपदा के समय त्वरित निर्णय लेना और हर समय तैयार रहना जरूरी है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी आ सकती हैं। गंगटोक के जिला अध्यक्ष बलराम अधिकारी ने कहा कि आपात स्थितियों से निपटने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर बल देते हुए जलभराव रोकने के लिए नालियों से मलबा हटाने की आवश्यकता बताई। साथ ही राहत सामग्री की उपलब्धता एवं राहत शिविरों की तैयारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में सड़क एवं पुल विभाग (एनएच विंग), एनएचआईडीसीएल, जीआरईएफ 129 आरसीसी, जीआरईएफ 87 आरसीसी, वन एवं पर्यावरण विभाग, विद्युत विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, एसटीएनएम अस्पताल, सेंट्रल रेफरल अस्पताल, शहरी विकास विभाग, गंगटोक नगर निगम, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा जल संसाधन एवं नदी विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी मानसून तैयारी योजनाएं प्रस्तुत कीं। प्रस्तुतियों में मानसून जनित आपदाओं से निपटने के लिए कार्ययोजना, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), संवेदनशील स्थलों की पहचान, रोकथाम उपाय, मानव संसाधन, मशीनरी एवं राहत सामग्री की उपलब्धता से संबंधित जानकारी दी गई। साथ ही विभिन्न विभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों तथा आपातकालीन समन्वय के लिए नियुक्त अधिकारियों के संपर्क विवरण भी साझा किए। बैठक की शुरुआत संयुक्त निदेशक, डीडीएमए सोनम वांग्याल लेप्चा के स्वागत भाषण से हुई, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गंगटोक के एसडीएम महेंद्र छेत्री ने प्रस्तुत किया।
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