टिकाऊ जैविक खेती से किसानों की आजीविका मजबूत करने पर जोर, विशेषज्ञों ने दी आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी

गंगटोक : सिक्किम सरकार के कृषि विभाग के अंतर्गत गंगटोक जिला कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) की ओर से ‘आजीविका सुरक्षा के लिए एकीकृत जैविक कृषि प्रणाली एवं टिकाऊ उत्पादन तकनीक’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय एसएएमईटीआई सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम को कृषि विज्ञान केंद्र, आईसीएआर-पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुसंधान परिसर, सिक्किम केंद्र, रानीपूल का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में जिला कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सह एटीएमए परियोजना निदेशक उपस्थित रहे। साथ ही, इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि भूमि की सुरक्षा, फसल नुकसान से बचाव और किसान आजीविका के संरक्षन हेतु शुरु किए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ के परिचय के साथ हुई। इसमें कृषि भूमि का निरंतर और टिकाऊ खाद्य उत्पादन के लिए उपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में केवीके, आईसीएआर-सिक्किम केंद्र, रानीपुल के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर किसानों और विभागीय कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। केवीके के बागवानी विषय विशेषज्ञ बोनिफेस लेप्चा ने संरक्षित खेती प्रणाली के तहत पूरे वर्ष उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती तथा जैविक कृषि में एकीकृत मृदा पोषक तत्व प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और संरक्षित खेती तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। सामुदायिक विज्ञान की एसीटीओ अनुश्री गोगोई ने घरेलू पोषण सुरक्षा, पारिवारिक संसाधन प्रबंधन, पोषण जागरुकता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार जैसे विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने फल, सब्जियों, मसालों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

वहीं, वनस्पति संरक्षण की विषय विशेषज्ञ डॉ स्वप्ना रानी ने सब्जियों, फलों और मसालों में एकीकृत कीट प्रबंधन की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जैविक नियंत्रण कारकों, जैव कीटनाशकों, वनस्पति अर्क और लाभकारी कीटों के इस्तेमाल पर जोर दिया।

कृषि प्रसार की विषय विशेषज्ञ डॉ. कोथा श्रावणी ने सहभागी पद्धति से कृषि प्रणालियों और किसानों की आजीविका संबंधी जरूरतों की पहचान, बाजार आधारित कृषि प्रसार सेवाओं, डिजिटल कृषि परामर्श तथा नई तकनीकों को अपनाने के प्रभावों के आकलन पर अपने विचार रखे। उन्होंने एसएचजी, एफपीओ और सामुदायिक समूहों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों, कृषि अधिकारियों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के बीच संवाद एवं ज्ञान का आदान-प्रदान भी हुआ। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम सिक्किम सरकार के कृषि विभाग की ओर से गंगटोक जिला एटीएमए के माध्यम से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने, विभागीय अधिकारियों एवं क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं की क्षमता विकसित करने, किसानों की आजीविका सुरक्षा मजबूत करने और जिले में कृषि समुदाय के समग्र विकास की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

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