गंगटोक : दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 72 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक बुधवार को गंगटोक स्थित जिला प्रशासनिक केंद्र में आयोजित की गई। गंगटोक जिला कलेक्टर रोहन अगवाने की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसडीएम (मुख्यालय) सीएस लिम्बू, सिंगताम जिला अस्पताल के डॉ चेदुप लेप्चा, मनोचिकित्सक डॉ बी दहाल, जिला प्रशासनिक केंद्र की विधिक सलाहकार प्रितिमा सुनाम, कल्पतरु प्रतिष्ठान के महासचिव गंगा प्रसाद भट्टराई, विद्युत विभाग के पीटर लेप्चा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की सामाजिक कल्याण अधिकारी और समिति सदस्य सचिव मणिकला गुरुंग सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
इस अवसर पर जिला कलेक्टर रोहन अगवाने ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, सम्मान, समान अधिकार, समावेशन और समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित तरीके से काम करते हुए प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पहुंचाने का निर्देश दिया। इससे पहले, बैठक की शुरुआत में सदस्य सचिव मणिकला गुरुंग ने समिति के उद्देश्यों और कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि जिला स्तर पर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा, सुगम्यता और समावेशन को बढ़ावा देने तथा कल्याणकारी योजनाओं और पुनर्वास उपायों को लागू करने की जिम्मेदारी समिति की है।
उन्होंने विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री दिव्यांग पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना की जानकारी दी। इसके साथ ही दिव्यांग व्यक्ति के साथ विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित सिक्किम अनुदान पुरस्कार योजना के तहत एकमुश्त दो लाख रुपये दिए जाने की जानकारी भी दी गई। गुरुंग ने विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) कार्ड के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरकारी लाभ और सेवाएं प्राप्त करने के लिए यह एक आवश्यक दस्तावेज है। यूडीआईडी कार्ड के माध्यम से दिव्यांगजन चिकित्सा, परिवहन, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी पात्र दिव्यांगजनों से यूडीआईडी कार्ड बनवाने की अपील की।
बैठक के दौरान दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के लिए विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में दिव्यांगजनों की देखभाल और सुरक्षा के लिए सहायता तंत्र मजबूत करने, देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने, लंबी बीमारी से पीड़ित दिव्यांगजनों के लिए अस्पतालों में अलग कमरे या वार्ड की व्यवस्था की संभावना तलाशने तथा देखभाल, पुनर्वास और सहायता सेवाओं के लिए डे-केयर केंद्र स्थापित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का निर्णय लिया गया।
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