चेन्नई । तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण अब राज्यपाल की भूमिका पर सबकी नजरें टिक गई हैं। इसी बीच माकपा ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करने की अपील की है। पार्टी ने कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है।
माकपा महासचिव एम ए बेबी ने गुरुवार को कहा कि जब किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तब संवैधानिक परंपरा यही कहती है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए राज्यपाल को विजय को शपथ लेने का मौका देना चाहिए। एम ए बेबी ने 1996 का उदाहरण भी दिया, जब अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी का नेता होने के नाते सरकार बनाने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद किसी भी शक से ऊपर होना चाहिए और फैसले में देरी नहीं होनी चाहिए।
एम ए बेबी ने यह भी माना कि डीएमके के साथ उनका गठबंधन चुनाव में हार गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण है। माकपा नेतृत्व जल्द चेन्नई में बैठक करेगा और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति में इस समय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने राज्यपाल से मुलाकात कर मांग की है कि तमिलगा वेत्री कड़गम के प्रमुख विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया जाए। थिरुमावलवन का तर्क है कि संविधान के अनुसार, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह और मोदी तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप कर भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विजय को अपना बहुमत राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
23 अप्रैल को हुए चुनावों में किसी को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला, लेकिन अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के साथ यह आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से महज 5 कम है। कम्युनिस्ट पार्टी ने ‘एसआर बोम्मई’ मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल का विजय से शपथ से पहले बहुमत मांगना अनुचित है। फिलहाल, माकपा कल होने वाली अपनी राज्य समिति की बैठक में विजय के समर्थन पत्र पर अंतिम फैसला लेगी।
23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। हालांकि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में पार्टी बहुमत के आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई है। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों का समर्थन विजय की पार्टी को देने का ऐलान किया है। इसके बावजूद टीवीके अभी भी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है। यही कारण है कि सरकार गठन को लेकर स्थिति उलझी हुई बनी हुई है। राजनीतिक दल लगातार अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार से अब तक दो बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की है। बताया गया कि राज्यपाल ने विजय को साफ कर दिया कि उनके पास फिलहाल जरूरी बहुमत नहीं है। इसी कारण उन्हें अभी सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया गया है। दूसरी तरफ विपक्षी दलों का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण टीवीके को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। अब सबकी नजरें राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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