तमिलनाडु में नया राजनीतिक अध्याय लिखने को तैयार जनता : PM मोदी

कोयंबटूर । तमिलनाडु का चुनावी पारा चढ़ने लगा है। प्रचार के अंतिम हफ्ते में सभी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कोयंबटूर में भाजपा-एनडीए की एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपना दुख-दर्द अपनों के बीच बांटना चाहते हैं। पीएम मोदी ने संसद में संविधान संशोधन का विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर ये बिल पारित हो जाता तो तमिलनाडु की बहुत सारी महिलाएं विधायक और सांसद बन पाती। लेकिन डीएमके ऐसा नहीं होने देना चाहती।

संसद में काले कपड़े पहनकर विरोध करने वाली सत्ताधारी पार्टी डीएमके को अंजाम भुगतने की चेतावनी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य की जनता डीएमके को सबक सिखाएगी। उन्होंने रैली में मौजूद जनता से कहा कि जब डीएमके नेता आपसे वोट मांगने आएं तो उनसे सवाल करें कि महिलाओं को लाभ दिलाने के मकसद से लाए गए इस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया गया? पीएम मोदी ने कहा कि डीएमके के कृत्य अब बहुत अच्छे से एक्सपोज हो चुके हैं। जनता डीएमके के काले कारनामे अच्छे से जान चुकी है। झूठ फैलाने से डीएमके के काले कारनामे छिपने वाले नहीं हैं।

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में बड़े सियासी बदलाव का संकेत मिलने की बात भी कही। उन्होंने कहा, नई शुरुआत के इस दौर में तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय लिखा जा रहा है। तमिलनाडु की जनता एक स्पष्ट संदेश दे रही है। एनडीए अंदर, डीएमके बाहर।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में तमिलनाडु में दो चीजें रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी हैं, एक सत्ताधारी परिवार की संपत्ति और दूसरा राज्य पर कर्ज का बोझ। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके लिन के परिवार के भीतर ‘बेटे और दामाद’ के बीच लूट की प्रतिस्पर्धा होने का दावा करते हुए कहा कि राज्य का पैसा जनहित के बजाय एक परिवार की तिजोरी में जा रहा है, जिससे तमिलनाडु के प्रत्येक नागरिक पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं तमिलनाडु को भारत के विकास के एक अहम इंजन के तौर पर देखता हूं। पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को 14 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा दिए हैं। यह पैसा टैक्स में हिस्सेदारी, हाईवे, एयरपोर्ट, रेलवे और जन-कल्याणकारी योजनाओं के रूप में मिला है। यह उस रकम से कहीं ज़्यादा है जो तमिलनाडु को तब मिली थी, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

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