हंता वायरस ने बढ़ाई चिंता, डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

नई दिल्ली । पश्चिम अफ्रीका के पास एक क्रूज शिप पर संदिग्ध हंता वायरस संक्रमण के बाद दुनिया भर में इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। जहाज पर कई लोग बीमार पड़े हैं और कुछ की मौत भी हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोरोना की तरह तेजी से फैलने वाला नहीं है, लेकिन गंभीर मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है।

इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतान नदी के नाम पर पड़ा है। सबसे पहले इस इलाके में 1978 में रहस्यमयी बुखार के मामलों के बाद वैज्ञानिकों ने वायरस की पहचान की थी। बाद में पता चला कि यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों और दूसरे कृन्तकों से इंसानों तक पहुंचता है।

हंता वायरस संक्रमित चूहों के पेशाब, लार और मल के जरिए फैलता है। कई बार सूखे मल या पेशाब के बेहद छोटे कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। यही संक्रमण का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। पुराने बंद मकान, गोदाम, खेत, लकड़ी के ढेर और गंदे स्टोर रूम ज्यादा जोखिम वाले स्थान माने जाते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य तौर पर हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता। हालांकि दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले हंता वायरस के प्रकार एंडीज वायरस के कुछ मामलों में सीमित मानव संक्रमण की आशंका जताई गई है। इसलिए फिलहाल इसे महामारी जैसा खतरा नहीं माना जा रहा।

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, शरीर दर्द, खासकर जांघ, कमर और पीठ की मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। कई मरीजों में सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, दस्त और पेट दर्द भी देखा जाता है।

संक्रमण के चार से दस दिन बाद मरीज को खांसी और सांस लेने में गंभीर दिक्कत शुरू हो सकती है। फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे हालत तेजी से बिगड़ सकती है। गंभीर मामलों में वायरस फेफड़ों, दिल और किडनी को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल हंता वायरस की कोई तय वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज को लक्षणों के आधार पर इलाज देते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ मामलों में एंटीवायरल दवा रिबाविरिन का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह हर प्रकार के संक्रमण में असरदार साबित नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका चूहों से दूरी बनाना है। घर और आसपास सफाई रखें, दीवारों और दरवाजों के छेद बंद करें, खाने-पीने की चीजें खुली न छोड़ें और लंबे समय से बंद कमरों की सफाई करते समय मास्क जरूर पहनें। चूहों के मल या पेशाब को सीधे हाथ से छूने से भी बचना चाहिए।

भारत में हंता वायरस के मामले बेहद कम सामने आते हैं। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज को डॉक्टर सारा चांडी के नेतृत्व में इस वायरस के मामलों पर स्टडी हुई थी। इस दौरान भारत में सालों पहले कुछ मामले मिले हैं लेकिन यह बहुत दुर्लभ है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क के बाद तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो तो मेडिकल जांच करानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन साफ-सफाई, चूहों से दूरी और सतर्कता बेहद जरूरी है। अगर घर, दुकान, गोदाम या आसपास चूहों की आवाजाही ज्यादा है तो हंता वायरस संक्रमण का खतरा बढ़ता है। लंबे समय से बंद पड़े कमरों, स्टोर रूम या पुराने मकानों की सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि सूखे मल या पेशाब के कण हवा में मिलकर शरीर में पहुंच सकते हैं। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर तेज बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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