कांग्रेस ने सत्ता में रहते देश को परिसीमन से वंचित रखा : अमित शाह

'कांग्रेस का दोहरा रवैया'

नई दिल्ली । लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर बहस का जवाब देते हुए कहा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए देश को परिसीमन से वंचित रखा और फिर यह पार्टी परिसीमन को रोकना चाहती है।

लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर जवाब देते हुए अमित शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इसमें एक व्यक्ति, एक मत और एक मूल्य के सिद्धांत का पूर्णतः उल्लंघन होता है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि परिसीमन के लिए ये लोग सहयोग कर दें, हम पर भरोसा करें, यह मूल्य एक समान हो जाएगा।

अमित शाह ने कहा, 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया। 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के काल में 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी। उस वक्त भी कांग्रेस पार्टी ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी कांग्रेस पार्टी ही परिसीमन से वंचित रख रही है। 2001 में 84वां संशोधन हुआ और 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया।

अमित शाह ने सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं वे कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। गृह मंत्री ने अलग-अलग सीटों के बीच जनसंख्या के असंतुलन का हवाला देते हुए कहा कि यह परिसीमन से ही ठीक हो सकता है और विपक्ष को इसमें सहयोग करना चाहिए।

अमित शाह ने कहा, सबने (सदन में) बोला कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन जब बारीकी से देखें तो इंडी गठबंधन के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके महिला आरक्षण का विरोध किया। उन्होंने कहा, किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख की आबादी हो गई है तो कहीं 60 हजार है। सांसद तो (अपने निर्वाचन क्षेत्र में) लोगों को अपना मुंह दिखा नहीं पाते…ऐसी स्थिति में कोई सांसद कैसे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेगा। उन्होंने कहा, इसी बात को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है।

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