नई दिल्ली । चार राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब भले ही सबको इंतजार नतीजों का है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नए मिशन पर जुट गई है। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी अब राजनीतिक गतिविधियों के अगले फेज में संगठनात्मक फेरबदल पर आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही शासन से जुड़े बदलाव भी फोकस में हैं। सबसे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है।
ऐसी चर्चा है कि मौजूदा टीम के दो-तीन महासचिवों के भी नई टीम में बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, नई टीम में ज्यादा फोकस युवा चेहरों पर किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी के अध्यक्ष नितिन नबीन खुद करीब 45 साल के हैं।
नितिन नबीन की नई टीम चुनने को लेकर हो रही देरी का पता इसी से चलता है कि पार्टी सोच-समझकर कदम उठा रही है, ताकि वह अपनी संगठनात्मक संरचना को आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के हिसाब से ढाल सके। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मई में कुछ अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। लंबे समय से अटके संगठनात्मक बदलावों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कैबिनेट फेरबदल और बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार पर भी फोकस है। उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में लंबे समय से अटके कैबिनेट फेरबदल पर सबका ध्यान टिका हुआ है। अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए उम्मीद है कि यह फेरबदल सिर्फ खाली पदों को भरने तक ही सीमित नहीं रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकते हैं। इसमें कुछ नए चेहरों को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को बेहतर ढंग से साधा जा सके। इसके साथ ही, पंकज चौधरी के नेतृत्व वाली यूपी बीजेपी यूनिट में भी एक नई टीम देखने को मिल सकती है, जिससे चुनावी प्राथमिकताओं के साथ संगठनात्मक तालमेल बना रहे।
बिहार में, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के विस्तार की तैयारियां जोरों पर हैं। बीजेपी-जेडीयू के बीच हुए समझौते के मुताबिक, दोनों पार्टियों को कैबिनेट में बराबर प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। इसमें हर पार्टी को करीब 16 मंत्री पद मिल सकते हैं। विभागों का बंटवारा भी इसी फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा।
इसी संदर्भ में, नितिन नबीन ने हाल ही में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात की और कैबिनेट विस्तार के स्वरूप पर चर्चा की। इस मुलाकात से यह भी साफ हो गया कि कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल बना हुआ है।
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