किशनगंज । बिहार विधानसभा सत्र के अंतिम दिन वंदे मातरम गायन की परंपरा शुरू होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। अख्तरूल ईमान समेत एआईएमआईएम नेताओं ने इसका विरोध किया है। बुधवार को किशनगंज स्थित एआईएमआईएम कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान अख्तरूल ईमान, विधायक सरवर आलम और राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन मौजूद रहे।
प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने वंदे मातरम के विरोध की वजह धार्मिक मान्यताओं को बताया। उन्होंने कहा, “हमारी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं। हम मूर्तिपूजा नहीं करते, बल्कि सिर्फ एक ईश्वर की इबादत करते हैं। जब हम दूसरों की आस्था का सम्मान करते हैं, तो हमारी मान्यताओं का भी सम्मान होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार के ऐसे “फरमान” को मानने के लिए किसी पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार पर पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसे विवाद खड़े कर रही है। अख्तरूल ईमान ने मांग की कि वंदे मातरम गायन को वैकल्पिक बनाया जाए। उनका कहना था कि जो लोग इसे गाना चाहते हैं, वे गाएं, लेकिन जो नहीं गाना चाहते, उन पर कोई दबाव न डाला जाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उर्दू शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया और नए मानक मंडल में उर्दू को शामिल करने की मांग की।
अख्तरूल ईमान ने जदयू विधायक गोपाल अग्रवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ जाने के बाद उनकी भाषा बदल गई है और वे शेरशाहबादी समाज को निशाना बना रहे हैं। वहीं विधायक सरवर आलम ने राज्य में बढ़ते अपराध और नशे की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की नशे पर कोई पकड़ नहीं है, जिसके कारण युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं और अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो बिहार की हालत उड़ता पंजाब जैसी हो सकती है।
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