सीपी शर्मा
सिक्किम में बढ़ते ईंधन संकट और मितव्ययिता उपायों के बीच मुख्यमंत्री पीएस गोले द्वारा अपनाई जा रही सादगी और जनभागीदारी की पहल अब राज्य में चर्चा का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री ने सरकारी वाहनों के उपयोग को सीमित करते हुए स्वयं पैदल चलकर बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया है। इसे सरकार की ‘सहभागिता आधारित राजनीति’ और संकट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री पीएस गोले, जिन्हें Prem Singh Tamang के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से समावेशी और सहभागितापूर्ण राजनीति पर जोर देते रहे हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव के समय मतदान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता और सरकार को नीति निर्माण, विकास और संकट की घड़ी में एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ईंधन की कमी और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए सिक्किम सरकार ने ‘किफायती नीति’ या मितव्ययिता उपाय लागू किए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने खुद सरकारी वाहन का उपयोग कम कर मिन्तोगांग से मनन केंद्र तक पैदल जाकर एक प्रतीकात्मक लेकिन प्रभावशाली संदेश दिया।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे सरकार की ओर से जनता को सहयोग और जिम्मेदारी निभाने की अपील के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब राज्य का सर्वोच्च नेतृत्व स्वयं सादगी अपनाता है, तो इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों पर भी पड़ता है।
लेख में कहा गया है कि सहभागिता केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज और प्रशासन के हर स्तर पर दिखाई देनी चाहिए। मौजूदा ईंधन संकट में केवल सरकारी आदेश पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नागरिकों को भी ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और संसाधनों की बचत की आदत अपनाने की जरूरत है।
विशेष रूप से सिक्किम जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में पर्यावरण संरक्षण, ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देने और प्लास्टिक मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। मितव्ययिता नीति को सफल बनाने में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी अहम माना गया है। लेख में कहा गया है कि अधिकारियों को सरकारी संसाधनों और सुविधाओं को अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझना चाहिए तथा संकट के समय स्वेच्छा से कटौती और संयम अपनाना चाहिए।
छोटी बैठकों के लिए सरकारी वाहनों के अत्यधिक उपयोग के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे विकल्प अपनाने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही सरकारी वाहनों का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों और तय मार्गों के लिए करने की सलाह दी गई है।
मुख्यमंत्री द्वारा कई बार सार्वजनिक मंचों से साझा परिवहन व्यवस्था और ‘कार पूलिंग’ को बढ़ावा देने की अपील की गई है। इसी के तहत गंगटोक के आसपास के लोगों की सुविधा के लिए रानीपुल से बस सेवा भी शुरू की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकें।
लेख में छात्रों से भी अपील की गई है कि वे संभव होने पर स्कूल और कॉलेज पैदल जाने की आदत विकसित करें, जिससे ईंधन की बचत के साथ स्वास्थ्य और अनुशासन को भी बढ़ावा मिलेगा।
लेख के निष्कर्ष में कहा गया है कि सरकारी नियमों का पालन केवल दंड के डर से नहीं, बल्कि राज्य और समाज के प्रति साझा जिम्मेदारी समझकर किया जाना चाहिए। जब अधिकारी सरकारी सुविधाओं के मोह से ऊपर उठकर सादगी अपनाते हैं और नागरिक संसाधनों को अपनी जिम्मेदारी मानकर बचत करते हैं, तभी मुख्यमंत्री पीएस गोले की ‘सहभागिता की राजनीति’ सही मायनों में सफल होगी।
लेख में यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति विशेष को पसंद या नापसंद करना अलग बात हो सकती है, लेकिन संकट के समय सरकार के निर्देशों का पालन नागरिक कर्तव्य के रूप में करना ही सच्ची सहभागिता है।
No Comments: