एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 27% कटौती की, यात्रियों की बढ़ेंगी मुश्किलें

नई दिल्ली । दिल्ली और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अमेरिका, पेरिस, रोम, शंघाई, सिंगापुर, मेलबर्न और सिडनी समेत 28 देशों के लिए फ्लाइट पकड़ने वाले लोगों को अगस्त तक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसका अहम कारण भारत से लंबी दूरी की सबसे अधिक इंटरनेशनल फ्लाइटों को टेक ऑफ कराने वाली एयर इंडिया द्वारा अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में रिकॉर्ड 27 फीसदी तक की कटौती करना है। इससे महाराजा की हर महीने तकरीबन 400 इंटरनेशनल फ्लाइट कम हो जाएंगी।

फ्लाइटों में यह राशनिंग फिलहाल जून से अगस्त तक के लिए की गई है। लेकिन हालात नहीं सुधरे तो इस कटौती में इजाफा करने के साथ इसकी समयावधि और बढ़ाई जा सकती है। इसमें भी सात देशों के लिए तो एयर इंडिया ने अपनी फ्लाइटों को अस्थायी तौर पर सस्पेंड ही कर दिया है।

एयर इंडिया ने फ्लाइटों में इस तरह से बड़े स्तर पर की गई कटौती का कारण महंगे होते जा रहे एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) और कुछ देशों के बंद एयरस्पेस को बताया। एयर इंडिया के मुताबिक, उसने अपनी तमाम इंटरनेशनल फ्लाइट शटडाउन नहीं की है। वर्तमान में उसकी अभी भी 1200 से अधिक इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेट हो रही हैं। जो इस कटौती से पहले तक तकरीबन 1600 थीं। महंगे एटीएफ और बंद एयरस्पेस से लंबी दूरी तय करने की वजह से उसकी ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ गई है। इस कारण उसे फायदा नहीं हो पा रहा है।

इसलिए तय किया गया कि भारत से नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, सार्क देश और साउथ-ईस्ट एशिया के देशों में जाने वाली फ्लाइटों में कटौती की जाए। इसमें सबसे बड़ी कटौती दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से ऑपरेट होने वाली फ्लाइटों के लिए की गई है। जिसमें दिल्ली से शिकागो, नेवार्क, शंघाई और माले, जबकि मुंबई से न्यूयॉर्क, और ढाका समेत चेन्नई से सिंगापुर जाने वाली फ्लाइटों को अस्थायी तौर पर अगस्त तक के लिए बंद कर दिया गया है।

इन इंटरनेशनल रूटों के अलावा दिल्ली और मुंबई से सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, वेंक्योर, न्यू यॉर्क, पेरिस, कोपनहेगन, मिलान, वियना, ज्यूरिख, रोम, मेलबर्न, सिडनी, सिंगापुर, बैंकॉक, क्वालालम्पुर, ढाका और कोलंबों के लिए फ्लाइटों में कटौती की गई है। केवल एक रूट मुंबई से नेवार्क के लिए फ्लाइट बढ़ाई गई हैं।

इस तरह से तीन महीने में करीब 1200 फ्लाइटों की कटौती करने पर एयरलाइंस के पायलटों और क्रू मेंबर में भय का माहौल भी बैठ गया है। डर है कि क्या सरप्लस रहने वाले पायलट और एयर होस्टेस की क्या छंटनी होगी? इनकी सैलरी में कोई कटौती की जाएगी? या फिर इन्हें लिव विदाउट पे वाले सिस्टम में रखा जाएगा। इन सवालों के जवाब में फिलहाल एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने हाल ही में हुए टाउनहाल में छंटनी करने से इंकार किया था। बाकी बातों पर अभी स्थिति साफ नहीं है।

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