नई दिल्ली । ईरान के उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने यूएई पर नाम लिए बगैर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का एक पड़ोसी ब्रिक्स घोषणापत्र में लगातार ईरान की भर्त्सना करने के लिए दूसरे देशों पर दबाव डाल रहा है, उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे कैसे मंजूर किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने भी कहा कि ईरान चाहता है कि भारत की अध्यक्षता में सफल ब्रिक्स समिट आयोजित की जाए और साझा घोषणापत्र सामने आए।
उन्होंने कहा कि दुनिया में इस तरह का संदेश नहीं जाना चाहिए कि ब्रिक्स एकजुट नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यूएई और सउदी अरब का नाम लिए बगैर कहा कि हमने ईरान पर इन दो देशों के हमलों को डॉक्यूमेंट किया है और उनके साथ साझा भी किया है। हम इस पर उचित फैसला लेंगे। ईरान-अमेरिका बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले वार्ताओं में मध्यस्थ ओमान था, और अब पाकिस्तान है। मधस्यस्थ की भूमिका केवल प्रक्रिया में होती है। उनका वार्ताओं में कोई पक्ष नहीं होता।
उन्होंने बताया कि ईरान ने भारत से भी पश्चिम एशिया में शांति के इनिशिएटिव यानि पहल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ही शांति की किसी भी पहल का स्वागत किया है। उसने हमेशा डायलॉग और डिप्लोमेसी की बात की है। हम किसी भी तरह की पहल का स्वागत करते हैं।
उन्होंने कहा ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक ऐसी सर्विस फीस के मैकेनिज्म पर काम कर रहा है। जो अंतर्राष्ट्रीय कानून और पारदर्शिता पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि ओमान और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को नेविगेशन समेत दूसरी सुविधाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके लिए लेकिन कभी इसके लिए किसी तरह की फीस नहीं लगाई। इसके साथ ही ये भी सही है कि मेरिटाइम कानूनों के तहत जहाजों को वहां से गुज़रने के लिए ट्रांजिट फी नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में कोई जबरदस्ती नहीं होगी, लेकिन ईरान एक ऐसे मैकेनिज्म पर काम कर रहे हैं जो कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और पारदर्शिता पर आधारित हो।
उन्होंने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज की ये स्थिति युद्ध से पहले वाली व्यवस्था से बेहतर होगी। उनका दावा है कि शांति की स्थिति में जब स्ट्रेट ऑफ होर्मूज खुल जाएगा तो बहुत शांति और सुरक्षा होगी। उन्होंने भारत को मित्र देश बताते हुए कहा कि अब तक हमने 11 भारतीय जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने दिया है। इसके साथ ही हम दूसरे भारतीय जहाजों के पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये व्यवस्था सिर्फ मित्र देशों के लिए है ना कि सबके लिए।
चाबहार को लेकर उन्होंने कहा कि एक जरूरी प्रोजेक्ट है और हम हम जानते हैं कि भारत की इसमें बहुत रूचि है और हम लिहाज से भारत का सहयोग करने को तैयार हैं। ये भारत पर निर्भर करता है कि वो इस मसले को अमेरिका के साथ किस तरह उठाए। उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष सीजफायर के पक्ष में नहीं था। लेकिन हमने सीजफायर इसलिए स्वीकार की क्योंकि हम वार्ताएं चाहते थे। ईरान चाहता है कि युद्ध का सभी मोर्चे पर खात्म हो, ईरान पर नेवी का ब्लॉकेड हटाया जाए और ईरान के फ्रीज संपत्ति रिलीज करे। हम चाहते हैं कि इन सभी मुद्दों पर एमओयू हो और वार्ताओं के लिए 30 दिन दिए जाएं।
हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिका शांति को लेकर गंभीर नहीं है और उसने संघर्ष का रास्ता चुन लिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस दौरान अपनी 40-50 फीसदी मिलिट्री का इस्तेमाल करना पड़ा। ईरान ने सभी मुद्दों पर दृढता से सामना किया। गरीबाबादी ने कहा कि शांति ताकत के जरिए नहीं ला सकती।
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