गेजिंग : नेपाली नववर्ष के उपलक्ष्य में जिले के मानेबुंग-देंताम क्षेत्र के चिवभंज्यांग में भारत-नेपाल सांस्कृतिक सम्मेलन की थीम पर आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक एवं व्यापारिक उत्सव ‘प्रथम बैसाखी हाट’ को आज समापन हो गया। सिक्किम सरकार के पर्यटन व नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा वाणिज्य व उद्योग विभाग के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास के साथ जोड़ने के राज्य सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
इसके समापन अवसर पर राज्य के वाणिज्य व उद्योग, पर्यटन व नागरिक उड्डयन मंत्री छिरिंग टी भूटिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ, क्षेत्रीय विधायक सह पर्यटन व नागरिक उड्डयन सलाहकार सुदेश कुमार सुब्बा, रिंचेनपोंग विधायक एरंग छिरिंग लेप्चा, मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार बीरेंद्र तामलिंग, वाणिज्य व उद्योग सलाहकार शेरमन तामलिंग, सिक्किम खादी विकास बोर्ड अध्यक्ष दीपक गुरुंग, सिक्किम भूमि उपयोग एवं पर्यावरण बोर्ड अध्यक्ष पुरबा छिरिंग भूटिया, गेजिंग डीसी तेनजिंग डेनजोंगपा और वाणिज्य व उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव श्री गोपाल छेत्री के अलावा अन्य ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल से शुरू हुए इस तीन दिवसीय सफल बैसाखी हाट में सिक्किम और नेपाल दोनों ओर से समुदाय की खासी भागीदारी देखने को मिली।
आज समापन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री भूटिया ने बैसाखी उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की यह इच्छा थी कि एक ऐसा सीमा-पार हाट आयोजित किया जाए, जो युवाओं को आय-सृजन के आवश्यक और लाभकारी अवसर प्रभावी ढंग से प्रदान कर सके। वहीं, मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ पत्राचार के माध्यम से चिवाभंज्यांग कॉरिडोर के समग्र विकास के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के बारे में बात करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाओं को समय पर पूरा करने के लिए ऐसे कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
मंत्री ने आगे दोनों देशों के हितधारकों को व्यापार एवं पर्यटन क्षेत्र में एक लाभदायक दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव देते हुए पर्यटन क्षेत्र में सामूहिक रूप से मूल्य संवर्धन पर विचार करने की बात कही। इसी कड़ी में, पूर्वी नेपाल के तापलेजुंग जिले में स्थित पवित्र तीर्थस्थल ‘मल्यांग युमा’ और ‘पार्थिवारा देवी मंदिर’ की अपनी यात्रा को याद करते हुए मंत्री ने बताया कि चिवाभंज्यांग कॉरिडोर के पूरा होने के बाद इन पवित्र स्थानों की यात्रा करना बहुत आसान हो जाएगा।
वहीं, क्षेत्रीय विधायक सुब्बा ने इस हाट के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह चिवाभंज्यांग में वर्ष 1950 में शुरू हुआ एक निर्धारित दिन लगने वाला पारंपरिक बाजार था। कुछ समय तक रुकने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी पहलें आपसी समझ को और मजबूत करते हुए दोनों देशों के युवाओं के लिए आय के लाभदायक स्रोत उत्पन्न करने में अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं से यह भी आग्रह किया कि वे इस पहल के उद्देश्य को आगे बढ़ाने और उसे बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएं।
कार्यक्रम में संयुक्त वाणिज्य व उद्योग सचिव गोपाल छेत्री ने इस पहल में सामूहिक रूप से शामिल होने के संबंध में विभाग के दृष्टिकोण को साझा किया। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने, सांस्कृतिक विरासत और प्रामाणिक व्यंजनों का अनुभव करने तथा मूल्यों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना था। इसके अलावा, इस उत्सव के अंतर्गत कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन, रस्साकशी जैसे खेल-कूद आयोजनों में दोनों देशों के स्थानीय लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
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