छितेन ताशी भूटिया ने राज्य के लंबित मुद्दों को संभालने के तरीकों पर जताई चिंता

गंगटोक : सिक्किम प्रदेश भाजपा नेता छितेन ताशी भूटिया ने राज्य के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान कई लंबित संवैधानिक, राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों को संभालने के तरीके पर चिंता जताई है।

अपने “गोल्डन जुबली, साइलेंट क्वेश्‍चंस : सिक्किम डिमांड्स अकाउंटेबिलिटी” शीर्षक वाले एक विस्तृत सार्वजनिक बयान में भूटिया ने 2025-26 तक साल भर चलने वाले राज्यत्व समारोह को हिमालयी राज्य के लोगों के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने 27-28 अप्रैल को सिक्किम आने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की और कहा कि इस यात्रा ने राज्य के विकास और राष्ट्रीय एकता के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता को पुष्ट किया। हालांकि, इसके साथ ही भूटिया ने आरोप लगाया कि राज्य से जुड़े कई संवेदनशील और अनसुलझे मामलों पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली सरकार ने ठीक से ध्यान नहीं दिया।

Tseten Tashi Bhutia के बयान में कहा गया, असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ने सिक्किम के लोगों की मुख्य चिंताओं और उम्मीदों को मजबूती से प्रतिनिधत्व करने और लगातार आगे बढ़ाने के लिए काफी कुछ किया है। भूटिया ने प्रधानमंत्री की तरफ से कोई चूक या नाकामी नहीं होने की बात कहते हुए कहा कि केंद्र उन मुद्दों पर जवाब देता है जो राज्य सरकार औपचारिक तौर पर और लगातार उठाती है।

भाजपा नेता ने कई लंबित मामलों की सूची भी बनाई, जिन पर उनके मुताबिक, राज्य सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। इनमें “सिक्किम : अब और तब (1975-2026)” नाम का श्वेत पत्र जारी करना, आर्टिकल 371एफ के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों को लागू करना तथा उनकी सुरक्षा, सिक्किमी मूल के नेपाली और शोंग विधानसभा सीटों की बहाली और उत्तर सिक्किम में 1200 मेगावाट के तीस्ता जल विद्युत समेत जल विद्युत परियोजना की समीक्षा शामिल है।

भूटिया ने 2023 ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) आपदा पर एक पूरी रिपोर्ट की भी मांग की, जिसमें मुआवजे, वित्तीय बंटवारे और सरकार द्वारा किए गए बहाली के उपायों से जुड़ी जानकारी शामिल हो। उन्होंने सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिफिकेशन जैसे पहचान के दस्तावेजों के कथित गैर-कानूनी तरीके से हासिल होने पर भी चिंता जताई और कहा कि इस मुद्दे का सीमा वाले राज्य में डेमोग्राफिक संतुलन, जातीय सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

बयान में यह भी कहा गया कि अगर विधानसभा की संख्या 32 सीटों से ज्यादा होती है, तो भूटिया-लेप्चा विधानसभा सीटें बढ़ाने की मांग की जाए। भूटिया ने राज्यसभा की एक संसदीय कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक, सिक्किम में भारतीय मूल के पुराने लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की भी मांग की।

इसके अलावा, फरवरी 2023 में संयुक्त कार्य परिषद-सिक्किम के तहत बुलाई गई एक ऑल-पार्टी मीटिंग में पारित हुए चार प्रस्तावों की स्थिति पर सफाई मांगते हुए भूटिया ने कहा कि इन मुद्दों में “सिक्किमी” शब्द की सुरक्षा, आर्टिकल 371एफ पर एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन, आरक्षित सीटों की बहाली और आवासी प्रमाणपत्र प्रावधान को रद्द करना शामिल है। वहीं, आर्थिक मामलों पर भूटिया ने राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ पर भी चिंता जताई।

बयान के मुताबिक, सिक्किम का कर्ज 1984-85 में लगभग 3.84 करोड़ से बढ़कर 2025 तक लगभग 26,605 करोड़ हो गया है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेंड से फिस्कल सस्टेनेबिलिटी और विकास प्राथमिकताओं को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।

बयान में राज्य में डेमोग्राफिक और एडमिनिस्ट्रेटिव बदलावों पर भी जोर दिया गया, जिसमें पिछले कुछ सालों में आबादी बढ़ना और सरकारी नौकरियों में बढ़ोतरी शामिल है। वहीं, भूटिया ने इनर लाइन परमिट कमेटी की रिपोर्ट, रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट धारकों द्वारा अचल प्रॉपर्टी खरीदने से जुड़े मामले, इकोनॉमिक रिवाइवल कमेटी की रिपोर्ट, लिम्बू-तमांग सीट आरक्षण का मामला, छूटे हुए समुदायों के लिए अनुसूचित जनजाति दर्जा और मतदाता सूची में बदलाव का ज़िक्र किया।

ऐसे में, राज्य सरकार से “तुरंत, ठोस, पारदर्शी और समयोचित कदम” उठाने की अपील करते हुए, भूटिया ने कहा कि आने वाला 51वां राज्यत्व दिवस 16 मई, 2026 सरकार को जल्दी और जवाबदेही के साथ काम करने की याद दिलाएगा।

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics