सोरेंग : सोरेंग जिला शिक्षा कार्यालय की सहायक शिक्षा पदाधिकारी सह कार्यशाला की स्थल समन्वयक सांता शर्मा के समन्वय में विज्ञान और गणित के स्नातक शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय कैस्केड शिक्षक क्षमता विकास कार्यशाला का चौथा चरण शनिवार को पीएम श्री जीएसएसएस सोरेंग में संपन्न हुआ।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (सिक्किम) ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), पुणे के सहयोग से आईआरआईएसई पहल के तहत इस कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में सोरेंग जिले के सभी छह प्रखंडों के कुल 46 शिक्षकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य विज्ञान और गणित के शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करना तथा व्यावहारिक गतिविधियों, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों और गतिविधि आधारित अध्यापन के माध्यम से कक्षा में पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाना था।
कार्यशाला में आईआईएसईआर पुणे की संसाधन विशेषज्ञ अपर्णा दाते ने शिक्षकों को मार्गदर्शन दिया। सोरेंग जिले के छह नवाचार चैंपियनों ने प्रमुख संसाधन व्यक्तियों के रूप में सहयोग किया। इनमें विज्ञान विषय के शिक्षक हेम राई गुरुंग, नीजुंज राई, पूर्णिमा राई और रेशमा राई तथा गणित विषय के शिक्षक शुभम गुरुंग और गोई लाल राई शामिल थे। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के अवलोकन और समन्वय में बैगुने स्थित प्रखंड प्रशासनिक केंद्र के उपनिदेशक डॉ रोशन प्रधान, कालुक प्रखंड प्रशासनिक केंद्र की उपनिदेशक सुषमा मोहरा, दरामदिन प्रखंड प्रशासनिक केंद्र के उपनिदेशक तिलक शर्मा तथा सोरेंग प्रखंड प्रशासनिक केंद्र के सहायक निदेशक ललित सुब्बा ने सहयोग किया। कार्यशाला के समापन समारोह में सोरेंग जिला शिक्षा कार्यालय के संयुक्त निदेशक एमके खेवा उपस्थित रहे।
उन्होंने शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास को आवश्यक बताते हुए कहा कि नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियां कक्षा में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के चारों चरणों की सफल समाप्ति से जिले के विज्ञान और गणित शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को व्यावहारिक शिक्षण रणनीतियों को समझने, अपने अनुभव साझा करने और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने वाली पद्धतियों को अपनाने का अवसर मिला। इन पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और विषयों की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने की क्षमता विकसित करने पर बल दिया गया।
जिला शिक्षा विभाग ने कार्यशाला की सफलता के लिए एससीईआरटी सिक्किम, आईआईएसईआर पुणे, संसाधन विशेषज्ञ, नवाचार चैंपियनों, प्रतिभागी शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विभाग ने आशा जताई कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल का शिक्षक कक्षाओं में प्रभावी ढंग से उपयोग करेंगे, जिससे विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव और जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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