गंगटोक : सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिक्किम अपनी विकास यात्रा के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तीव्र, समावेशी और पर्यावरणीय रूप से सतत विकास के लिए पांच रणनीतिक स्तंभ तय किए हैं। इनमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को मजबूत करना, बुनियादी ढांचे एवं संपर्क में सुधार, मानव पूंजी में निवेश, पारिस्थितिक विरासत के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास तथा नियोजित और लचीले शहरीकरण को बढ़ावा देना शामिल है। राज्यपाल ने कहा कि इन प्राथमिकताओं के आधार पर सिक्किम को ‘सुनौलो सिक्किम, समृद्ध सिक्किम, समर्थ सिक्किम’ के साझा विजन की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि सिक्किम अपनी स्थापना के 51वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की शीर्ष संवैधानिक एवं राष्ट्रीय हस्तियों की यात्राओं को राज्य की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान सिक्किम पुलिस को प्रेसिडेंट कलर, राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किए जाने, ‘आमा दीदी बहिनी पिंक बस सेवा’ के शुभारंभ और सिक्किम को देश की पहली पेपरलेस न्यायपालिका घोषित किए जाने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। उन्होंने कहा कि बीते पांच दशकों में सिक्किम ने भौगोलिक और आर्थिक सीमाओं के बावजूद बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और जन-केंद्रित नीति निर्माण राज्य की विकास यात्रा की प्रमुख विशेषताएं रही हैं। राज्यपाल ने बताया कि सिक्किम का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2026-27 में 62,973 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2018-19 में यह 28,402 करोड़ रुपये था। इस तरह इस अवधि में जीएसडीपी में 121 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है।
राज्यपाल माथुर ने कहा कि देश में सर्वाधिक वन आवरण अनुपात वाले राज्यों में शामिल सिक्किम जैव विविधता संरक्षण, जलवायु नियमन और जल सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल को राज्य में व्यापक जनसमर्थन मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘मेरो रुख मेरो संतति’ को विशिष्ट जन-केंद्रित संरक्षण आंदोलन बताया। इसके तहत प्रत्येक बच्चे के जन्म पर 108 पेड़ लगाने की पहल की जा रही है। ‘शिशु समृद्धि योजना’ के साथ इसे जोड़कर पर्यावरणीय संरक्षण और नवजातों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एकल उपयोग प्लास्टिक के नियमन, अपशिष्ट प्रबंधन, आर्द्रभूमि संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में सिक्किम ने राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण पेश किए हैं। लाल पांडा और हिम तेंदुए जैसी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के साथ इको-टूरिज्म और सामुदायिक होमस्टे ग्रामीण आजीविका के अवसर पैदा कर रहे हैं। वर्ष 2026 में मंगन जिले में मिश्मी टाकिन के दुर्लभ झुंड और यूरेशियाई लिंक्स के दिखने को उन्होंने राज्य की समृद्ध पर्वतीय जैव विविधता का प्रमाण बताया।
राज्यपाल ने शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 मई 2026 को सिक्किम ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत देश का पांचवां पूर्ण साक्षर राज्य बना। चार हजार से अधिक शिक्षकों और स्वयंसेवकों के प्रयासों से दो वर्षों में करीब 15 हजार वयस्कों को साक्षर बनाया गया। उन्होंने कहा कि सिक्किम देश का पहला राज्य है जिसने सभी सरकारी विद्यालयों में किंडरगार्टन प्रणाली शुरू की है। मुख्यमंत्री विशेष संख्यात्मकता कार्यक्रम के तहत बुनियादी अंकगणित में दक्ष बच्चों का अनुपात दो वर्षों में 17 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि 1,000 से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विशेष शिक्षकों, सहायक तकनीक और व्यक्तिगत हस्तक्षेप के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है। आसाम लिंगजे का मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल 123 विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, आवास के साथ एआई, कोडिंग, रोबोटिक्स, रॉकेट्री, व्यावसायिक शिक्षा, खेल और कला की सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। राज्य में 43 विद्यालयों को पीएम श्री योजना के तहत विकसित किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘सबके लिए स्वास्थ्य’ के लक्ष्य के तहत स्वास्थ्य अवसंरचना और विशेषज्ञ सेवाओं का लगातार विस्तार किया गया है। 500 बेड वाले नामची जिला अस्पताल और 100 बेड वाले मंगन जिला अस्पताल के उद्घाटन के साथ एसटीएनएम अस्पताल में न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू की गई हैं। राज्य के पहले तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र की स्थापना से उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव की दर 99.64 प्रतिशत पहुंच गई है और शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति हजार जीवित जन्म पर छह रह गई है। 51 ग्राम पंचायत इकाइयों को टीबी-मुक्त घोषित किया जा चुका है। मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए सुसाइड प्रिवेंशन एक्शन नेटवर्क, जिला मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और टेली-मानस के जरिए सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
माथुर ने कहा कि सिक्किम को अग्रणी वैश्विक पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए पर्यावरणीय संतुलन के साथ बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। भालेढुंगा स्काईवॉक, सिंगशोर ब्रिज एडवेंचर प्लेटफॉर्म, पेलिंग रोपवे, नाथुला सीमा अनुभव परियोजना, नामली सांस्कृतिक ग्राम और युकसम इको-वेलनेस अनुभव जैसी परियोजनाओं से पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सेवोके-रंगपो रेल संपर्क और हेलीपोर्ट सेवाओं से राज्य की कनेक्टिविटी बेहतर होने की बात भी उन्होंने कही। राज्य में एक हजार से अधिक होमस्टे विकसित किए जा रहे हैं। चो ला और डोकाला जैसे नए युद्धक्षेत्र पर्यटन स्थलों को ‘रणभूमि दर्शन’ कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन आधारित आर्थिक विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सिक्किम में एमएसएमई की संख्या 2019 के करीब 250 से बढ़कर जनवरी 2026 तक 35 हजार से अधिक हो गई है। सिक्किम एमएसएमई नीति-2022 और स्टार्टअप नीति-2025 के जरिए बाजार संपर्क, कौशल विकास और कारोबार सुगमता को बढ़ावा दिया जा रहा है। डीपीआईआईटी राज्य स्टार्टअप इकोसिस्टम रैंकिंग 2026 में सिक्किम को ‘एस्पायरिंग लीडर’ के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने बताया कि 130 से अधिक नियोक्ताओं के साथ साझेदारी के माध्यम से नियुक्ति केंद्र ने 1,100 से अधिक प्लेसमेंट सुनिश्चित किए हैं। सिक्किम इंस्पायर्स कार्यक्रम के तहत जर्मनी में 19 सिक्किमी युवा महिलाएं पंजीकृत नर्स के रूप में कार्यरत हैं। राज्यपाल ने कहा कि सरकार पर्यटन, आईटी, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, रचनात्मक उद्योग, वेलनेस, जैविक कृषि और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में युवाओं के कौशल विकास पर जोर दे रही है।
महिला सशक्तिकरण को विकास का आधार बताते हुए माथुर ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। सिक्किम आमा सशक्तिकरण योजना के तहत एकल माताओं को सहायता दी जा रही है, जबकि आमा सहयोग योजना के माध्यम से पात्र माताओं को प्रतिवर्ष मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने ‘आमा दीदी बहिनी’ पिंक बस सेवा को महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। यह बस सेवा महिला चालकों और परिचालकों द्वारा संचालित की जा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप सिक्किम विजन-2047 तैयार किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संचालन समिति और प्रोफेसर एमपी लामा की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित की गई है। नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत स्थापित एसआईटी तथा ‘इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम’ के माध्यम से साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, निगरानी और मूल्यांकन को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिक्किम इंस्पायर्स, सिक्किम विद्युत क्षेत्र विकास परियोजना और सिक्किम एकीकृत शहरी विकास परियोजना जैसी बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं मानव पूंजी, ऊर्जा और शहरी अवसंरचना को मजबूत कर रही हैं।
स्वतंत्रता दिवस संदेश के अंत में राज्यपाल ने युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने और ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ युवाओं का अपनी मिट्टी, संस्कृति, भाषा और जड़ों से जुड़े रहना भी जरूरी है।
माथुर ने कहा कि सिक्किम का लक्ष्य ऐसा समाज बनाना है जो तकनीक में दक्ष, विचारों में आधुनिक और कर्म में आत्मनिर्भर हो, लेकिन अपनी संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ा रहे। उन्होंने पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए उनसे अपनी सफलता को समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।
अंत में राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अमूल्य धरोहर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गरिमा, सुरक्षा, समान अवसर और सम्मान के साथ जीवन देने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने शांति, एकता और करुणा के मूल्यों को मजबूत करते हुए सभी से मिलकर ‘विकसित सिक्किम’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की और ‘जय हिंद, जय सिक्किम’ के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
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