गेजिंग : सिक्किम के गौरव और देश के पहले मिश्रित (सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक) यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) के यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को योक्सम में भव्य समारोह आयोजित किया गया। वर्ष 2016 में इसी दिन कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मिक्स्ड कल्चरल एंड नेचुरल हेरिटेज श्रेणी में शामिल किया गया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की दसवीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन, वाणिज्य एवं उद्योग तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री छिरिंग टी. भूटिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह में राज्य औषधीय पौधा बोर्ड के सलाहकार एनबी लिम्बू, गेजिंग जिला पंचायत अध्यक्ष डीएस लिम्बू, कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान की डीएफओ भूमिका राई, वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी, विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि, इको डेवलपमेंट कमेटियों (ईडीसी), संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी), पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक, स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर राज्य सरकार की ‘मेरो रुख मेरो संतति (एमआरएमएस)’ योजना के अंतर्गत शिशु समृद्धि योजना के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र और पासबुक वितरित किए गए। इसके साथ ही वन एवं पर्यावरण विभाग ने फसल और पशुधन क्षति से प्रभावित किसानों को अनुग्रह सहायता (एक्स-ग्रेशिया) भी प्रदान की। ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) के तहत योक्सम टेरिटोरियल रेंज और योक्सम केएनपी रेंज द्वारा स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामुदायिक संगठनों को मेज, कुर्सियों सहित विभिन्न सामाजिक परिसंपत्तियां भी वितरित की गईं।
मुख्य अतिथि छिरिंग टी. भूटिया ने अपने संबोधन में कहा कि कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना सिक्किम के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहा कि इस मान्यता ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यह उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के कारण विश्वभर में विशिष्ट स्थान रखता है।
उन्होंने कहा कि यूनेस्को की मान्यता केवल सम्मान नहीं बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। स्थानीय समुदायों, पर्यटन व्यवसायियों और सभी हितधारकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संरक्षण और विकास साथ-साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि ईको-टूरिज्म, ग्राम पर्यटन और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को का दर्जा एक बड़ा अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसके लिए पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मंत्री ने युवाओं से पर्यटन क्षेत्र में उद्यमिता अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सतत पर्यटन के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में शुरू की गई राज्य सरकार की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों ‘मेरो रुख मेरो संतति (एमआरएमएस)’ और ‘मेरो रुख मेरो बहिनी (एमआरएमबी)’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना है। उन्होंने लोगों, विशेषकर स्थानीय समुदायों से इन अभियानों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
छिरिंग टी भूटिया ने कहा कि पर्यटन सिक्किम की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है और सरकार राज्यभर में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विरासत स्थलों, गांव आधारित पर्यटन, ट्रेकिंग मार्गों और ईको-टूरिज्म स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए बताया कि कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले जोंगरी-गोइचा ला ट्रेकिंग मार्ग पर भी विकास कार्य जारी हैं, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने योक्सम-ताशिडिंग विधानसभा क्षेत्र में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की भी जानकारी दी और कहा कि पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
इससे पूर्व डीएफओ भूमिका राई ने कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उद्यान अपनी अद्वितीय जैव विविधता, पवित्र प्राकृतिक स्थलों, सांस्कृतिक विरासत और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के कारण विश्व स्तर पर विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि इस धरोहर की रक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
रेंज अधिकारी तेनजिंग डब्ल्यू भूटिया ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न संरक्षण कार्यक्रमों और सामुदायिक कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मेरो रुख मेरो संतति सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों और स्थानीय लोगों की सहभागिता पर विशेष जोर दिया।
गौरतलब है कि 17 जुलाई 2016 को कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मिश्रित सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर श्रेणी में शामिल किया गया था। इसके साथ ही यह भारत का पहला मिश्रित विश्व धरोहर स्थल तथा सिक्किम का एकमात्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया। यह उद्यान कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व का भी हिस्सा है और ग्यालशिंग तथा मंगन जिलों में फैला हुआ है।
करीब 1,784 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अपनी असाधारण जैव विविधता, पवित्र पर्वतीय परिदृश्यों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्व के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट कंचनजंगा के नाम पर स्थापित इस उद्यान से होकर देश के सबसे प्रसिद्ध उच्च हिमालयी ट्रेकिंग मार्गों में शामिल जोंगरी-गोइचा ला ट्रेक गुजरता है। यहां रोडोडेंड्रॉन की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे पूर्वी हिमालय के सबसे समृद्ध अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बनाती हैं।
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