मुंबई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि चीन और पाकिस्तान के साथ हमेशा के लिए बातचीत बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पाकिस्तान दिल से भारतीयों के दुश्मन नहीं हैं, यही बात भारतीयों के साथ भी है कि भारतीय पाकिस्तानी लोगों के दुश्मन नहीं हैं। भागवत का यह बयान तब आया जब हाल ही में भारत और पाकिस्तान के करीब 100 से ज्यादा बुद्धिजीवियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर भारत-पाकिस्तान के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की मांग की थी।
बहरहाल, मुंबई में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में पाकिस्तान और चीन के साथ नागरिक समाज के संपर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर भागवत ने कहा कि संघर्ष या युद्ध की स्थिति में ऐसे संवाद उचित नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चीन और पाकिस्तान के साथ हमेशा के लिए संवाद बंद नहीं किया जा सकता। भागवत के मुताबिक युद्ध और आतंकवाद के समय भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्पष्ट रुख रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर कब्जा नहीं किया।
संघ प्रमुख भागवत ने कहा, टकराव के समय हमें अपनी सरकार के फैसले के साथ चलना होता है। लेकिन इससे पहले से बने रिश्ते नहीं टूटने चाहिए। चीन के लोग कहते हैं कि 2000 साल पहले भारत ने उन्हें कुछ मूल्य दिए थे; और पाकिस्तान 100 साल से भी कम समय पहले भारत का ही हिस्सा था। यह बात नहीं भूलनी चाहिए; ये रिश्ते खत्म नहीं किए जा सकते, टकराव रहने तक इन्हें कुछ समय के लिए रोका जा सकता है।
भागवत ने कहा, लेकिन भारत का समाधान क्या है? भारतीय समाधान दूसरों को जीतना या खत्म करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा तालमेल वाला और सबको साथ लेकर चलने वाला तरीका अपनाना है जिसमें बातचीत की जरूरत होती है। इसलिए, टकराव इन रिश्तों को रोक तो सकता है लेकिन खत्म नहीं कर सकता, और न ही ऐसा होना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा, कभी-कभी, टकराव खत्म होने के बाद हमें वहीं से आगे बढ़ना होता है जहां हमने छोड़ा था। इसलिए, हमेशा नफरत और दुश्मनी बनाए रखना समाधान नहीं है। जब कोई परेशानी आती है, तो हमें उसे संभालना होता है और उसे संभालने का एक तरीका भी होता है। हमें उस तरीके को अपनाना चाहिए। लेकिन यह सब कुछ समय के लिए होता है, यह राजनीति की वजह से होता है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी दिल से भारतीयों के दुश्मन हैं, या भारतीय ऐसे हैं। लेकिन देश, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भी होती हैं – यह भी जीवन की एक लड़ाई है। इसलिए, टकराव के समय हम अपनी सरकार और अपनी सेना के साथ खड़े होते हैं। लेकिन हम जानते हैं कि कभी-कभी इसे खत्म होना ही होता है और हमें एक होना पड़ता है। क्योंकि मानवता एक है।
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