गंगटोक : विकसित पूर्वोत्तर क्षेत्र के लक्ष्य को गति देने और राज्यों में साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन की ओर से सोमवार को मिजोरम की राजधानी आइजोल में क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। “स्ट्रेंथनिंग एसआईटी्स टू ड्राइव विकसित नॉर्थ ईस्ट रीजन” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य परिवर्तन संस्थानों को प्रभावी बनाने, उनकी प्रगति की समीक्षा करने तथा राज्यों के सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों और सहयोग की जरूरतों पर चर्चा करना था। नीति आयोग का स्टेट सपोर्ट मिशन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य परिवर्तन संस्थानों की स्थापना और उन्हें मजबूत करने में सहयोग करता है। देशभर में अब तक 35 ऐसे संस्थान औपचारिक रूप से स्थापित किए जा चुके हैं।
कार्यशाला में राज्य की दीर्घकालिक परिकल्पना तैयार करने, जिला घरेलू उत्पाद के आकलन तथा निगरानी और मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत करने जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में मिजोरम के मुख्यमंत्री पी लालदुहोमा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सिक्किम सरकार की ओर से योजना एवं विकास विभाग के आयुक्त सह सचिव मिंग्मा टी. शेरपा ने भाग लिया। उनके साथ स्टेट सपोर्ट मिशन के क्षेत्र विशेषज्ञ कुशल तमांग और बिजय छेत्री भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर मिंग्मा शेरपा ने पूर्वोत्तर के सात अन्य राज्यों के अधिकारियों, नीति आयोग के प्रतिनिधियों तथा आईआईटी गुवाहाटी और आईआईएम कोलकाता जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय परिचर्चा में पैनल सदस्य के रूप में भाग लिया। उन्होंने सिक्किम में राज्य परिवर्तन संस्थान की प्राथमिकताओं, दीर्घकालिक विकास दृष्टि तैयार करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राज्य में एसआईटी की अवधारणा से पहले ही “इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम” की स्थापना की गई थी, जो नीतिगत फैसलों, निगरानी और मूल्यांकन के लिए विचार मंच के रूप में काम कर रहा है। शेरपा ने बताया कि सिक्किम विजन 2047 तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक संचालन समिति भी गठित की गई है। राज्य की एसआईटी टीम विभिन्न विभागों के साथ मिलकर योजना प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
बताया गया कि सिक्किम की टीम ने राज्य की वित्तीय स्थिति, कर एवं गैर-कर राजस्व स्रोतों तथा वस्तु एवं सेवा कर के प्रभाव पर प्रारूप रिपोर्ट भी तैयार की है। इन रिपोर्टों की फिलहाल विशेषज्ञ समीक्षा की जा रही है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें अन्य राज्यों के साथ सीख और अनुभव साझा करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया जाएगा।
बैठक में सिक्किम ने आंकड़ों की उपलब्धता में कमी और तकनीकी क्षमता की सीमाओं को प्रमुख चुनौती बताया। इन कमियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान, दिल्ली को जोड़ने की प्रक्रिया में है, ताकि सांख्यिकीय और विश्लेषणात्मक क्षमता को और मजबूत किया जा सके।
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि मजबूत राज्य परिवर्तन संस्थान “विकसित राज्य से विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए राज्यों में बेहतर योजना व्यवस्था, विश्वसनीय आंकड़ा प्रणाली तथा प्रभावी निगरानी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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