गंगटोक। जवाहरलाल नेहरू राजमार्ग (जेएलएन) के 13 माइल के निकट स्थित संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र में आज बुधवार को प्रस्तावित सेंसर आधारित भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना को लेकर स्थल निरीक्षण किया गया। यह क्षेत्र प्रतिवर्ष भूस्खलन की घटनाओं से प्रभावित रहता है, जिससे भारतीय सेना की आवाजाही तथा छांगू झील और नाथुला जाने वाले पर्यटकों को काफी जोखिम का सामना करना पड़ता है। भूस्खलन की वास्तविक समय में निगरानी तथा प्रभावी पूर्व चेतावनी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे संयुक्त पहल के तहत किया गया।
प्रस्तावित प्रणाली के माध्यम से आपदा से निपटने की तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने, त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने तथा ढलानों की अस्थिरता से उत्पन्न जोखिम को कम करने में सहायता मिलेगी। जानकारी के अनुसार, परियोजना से संबंधित फील्ड कार्य अगले महीनों में शुरू किए जाएंगे। स्थल निरीक्षण से पूर्व गंगटोक के डीसी रोहन अगवाने (आईएएस) ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निरीक्षण दल के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। इसके बाद टीम ने क्षेत्र का दौरा कर विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गंगटोक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण संयुक्त निदेशक सोनम वांग्याल लेप्चा, डीजीआरई-डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. प्रतीक चतुर्वेदी, सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डीपी कनूंगो, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. आरके पाणिग्रही, वन विभाग के बीओ (टी) अभिजीत छेत्री अपनी टीम के साथ तथा राजस्व निरीक्षक शेराप जंग्पो उपस्थित रहे। संबंधित एजेंसियों एवं तकनीकी संस्थानों की यह पहल क्षेत्र में आपदा प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने तथा जेएलएन राजमार्ग के संवेदनशील हिस्सों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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