लाचेन-लाचुंग में सीवेज निस्तारण पर हाईकोर्ट का अल्टीमेटम

चार सप्ताह में नियमों का पालन नहीं करने वाले होटल होंगे बंद

गंगटोक : सिक्किम हाईकोर्ट ने लाचेन और लाचुंग में होटलों तथा घरों से निकलने वाले बिना उपचार वाले सीवेज को नदियों में बहाने पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं करने वाले होटलों को बंद करना पड़ेगा। लाचेन छू और लाचुंग छू, तीस्ता नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं। मुख्य न्यायाधीश ए मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की पीठ ने इस स्थिति को बेहद खेदजनक बताया।

यह आदेश खेतों में कचरे और अपशिष्ट से संबंधित स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका, डब्ल्यूपी (पीआईएल) संख्या 10/2026 पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने मंगन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की निरीक्षण रिपोर्ट पर संज्ञान लिया, जिसे सिक्किम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने आगे भेजा था। रिपोर्ट में बताया गया कि पर्यटन के व्यस्त मौसम में दोनों स्थानों पर सेप्टिक टैंक भरकर उफनने लगते हैं। इसके बाद अतिरिक्त काला और धूसर गंदा पानी पाइपों के जरिए नालों, झोरों और छोटी जलधाराओं में पहुंचता है, जो आगे नदियों में मिलती हैं। लाचुंग के कुछ घरों में सीवेज पाइप सीधे नदी से जुड़े पाए गए। निरीक्षण के दौरान दुर्गंध और पीले रंग का पानी भी देखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, लाचेन की आबादी 3,010 और लाचुंग की 3,332 है। पर्यटन के चरम मौसम में इन स्थानों पर प्रतिदिन क्रमशः करीब 1,575 और 2,309 पर्यटक भी पहुंचते हैं। इसके अलावा लाचेन में लगभग 1,500 और लाचुंग में 1,900 सैन्यकर्मी तैनात हैं। इससे अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती और बढ़ जाती है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल होटलों और घरों के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा चार सप्ताह के भीतर अनुपालन की प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि निर्धारित अवधि में पालन नहीं होने पर संबंधित होटलों को अनुपालन होने तक बंद करना आवश्यक होगा।

पीठ ने लाचेन और लाचुंग के जुम्सा भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। सिक्किम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों, दोनों गांवों के पिपोन और मंगन जिला कलेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने को कहा गया है। अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर प्रत्येक जिले में सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) की आवश्यकता वाले स्थानों की पहचान करने का निर्देश दिया है। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर जल शक्ति मंत्रालय से संपर्क करना होगा और पांच सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। अदालत को बताया गया कि चुंगथांग में एक एसटीपी स्थापित किया जा रहा है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में फिलहाल ऐसे संयंत्र नहीं हैं।

सभी छह जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को चार सप्ताह के भीतर संबंधित क्षेत्रों की रिपोर्ट संकलित करने को कहा गया है। इसके लिए राज्य सरकार अतिरिक्त धन उपलब्ध कराएगी। इसके बाद मामले में न्याय मित्र तारा देवी छेत्री समेकित रिपोर्ट अदालत में पेश करेंगी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत लाचेन और लाचुंग में सीवरेज प्रणाली तथा शोधन संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय ने इसे स्वीकार नहीं किया। निदेशालय का कहना था कि ये परियोजनाएं नदी संरक्षण के बजाय कस्बाई बुनियादी ढांचे से संबंधित हैं। राज्य सरकार ने जवाब दिया है कि बिना उपचार वाला अपशिष्ट सीधे नदियों में जा रहा है। इस मामले में निदेशालय की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

थांगु स्थित सैन्य क्षेत्र में अधिकारियों ने बताया कि तरल अपशिष्ट को निर्धारित गड्ढों में डाला जाता है। वहां बैक्टीरिया आधारित उपचार का परीक्षण भी चल रहा है, जिसके परिणाम छह से सात महीने में आने की उम्मीद है।

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