गंगटोक : 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सिक्किम सरकार के आयुष विभाग द्वारा बुधवार को ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय पर राज्यस्तरीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से आयुष चिकित्सकों, विभागीय अधिकारियों और तादोंग स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के माध्यम से रोगों की रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली, वैज्ञानिक अनुसंधान और आयुष चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा धन्वंतरि मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। इस अवसर पर आयुष विभाग के सलाहकार ए.के. घतानी मुख्य अतिथि तथा अध्यक्ष मनोज प्रधान सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ए.के. घतानी ने कहा कि स्वस्थ भविष्य की शुरुआत आज की स्वस्थ आदतों से होती है। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों और रोगों की रोकथाम में आयुर्वेद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के सिद्धांतों को अस्पतालों तक सीमित न रखकर घरों, विद्यालयों, कार्यस्थलों और समुदायों तक पहुंचाना आवश्यक है। साथ ही पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता और सुरक्षा के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए।
घतानी ने सिक्किम की समृद्ध हिमालयी जैव विविधता और औषधीय पौधों के संरक्षण, खेती, अनुसंधान तथा सतत उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने प्रस्तावित आयुर्वेद अस्पताल एवं महाविद्यालय, सोवा रिग्पा शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तथा स्वास्थ्य केंद्रों के विकास से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया।
इससे पहले, विभागीय सचिव सुचित्रा रसाइली ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि सिक्किम में आयुष को स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित हुए लगभग एक वर्ष ही हुआ है, लेकिन इस अवधि में कई महत्वपूर्ण संस्थागत पहल की गई हैं। इनमें भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए आयुष परिषद का गठन, अलग आयुष संवर्ग स्थापित करने की प्रक्रिया और आयुष चिकित्सकों की पदोन्नति प्रमुख हैं। उन्होंने विभाग को सुदृढ़ बनाने में मुख्यमंत्री के सहयोग तथा आयुष मंत्री जीटी ढुंगेल के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बीच आयुर्वेद की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। विभाग चिकित्सा सेवाओं, आधारभूत संरचना, मानव संसाधन, औषधियों, अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले आयुष कर्मियों को सम्मानित किया गया। किर्गिस्तान में आयोजित विश्व स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एवं आईबीपी चैंपियनशिप में 72 किलोग्राम वरिष्ठ महिला वर्ग में दो रजत पदक जीतने वाली डॉ मिलन प्रधान को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा हाल ही में पदोन्नति प्राप्त करने वाले पांच होम्योपैथिक चिकित्सकों तथा फुटसल प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाले योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा चिकित्सकों को बधाई दी गई। मानसरोवर यात्रा के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों के 10 जत्थों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए डॉ. आदर्श शर्मा को भी सम्मानित किया गया।
वहीं, तकनीकी सत्रों में क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, तादोंग के अनुसंधान अधिकारी डॉ देबज्योति दास ने स्वस्थ भविष्य में आयुर्वेद की भूमिका पर व्याख्यान दिया। डॉ एजेवी साई प्रसाद ने आयुष औषधियों के प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी और उनकी रिपोर्टिंग के महत्व को समझाया। उनके साथ, डॉ निधि राई ने आयुष औषधियों एवं उपचार से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों की रिपोर्टिंग तथा औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के प्रावधानों पर जानकारी दी।
इस दौरान राष्ट्रीय आयुष मिशन की वित्त वर्ष 2026-27 की त्रैमासिक समीक्षा बैठक भी आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता विभागीय सचिव ने की। बैठक में मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
कार्यक्रम में आयुष सेवाओं को सुरक्षित, नैतिक, वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित और रोगी-केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
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