मसौदा दस्तावेज में ‘चौथे रास्ते’ को लेकर सिब्लैक संयोजक ने राज्य सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

गंगटोक : सिक्किम भूटिया लेप्चा एपेक्स कमेटी (सिब्लैक) के संयोजक एवं पूर्व मंत्री छितेन ताशी भूटिया ने अर्थशास्त्री प्रो महेंद्र पी लामा के जुलाई 2026 के एक मसौदा दस्तावेज में कथित रूप से शामिल किए गए ‘चौथे रास्ते’ को लेकर सिक्किम सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। भूटिया भाजपा की सिक्किम इकाई के मुख्य सलाहकार भी हैं।

छितेन ताशी भूटिया ने कहा कि अर्थशास्त्री प्रो. महेंद्र पी. लामा ने बाद में स्पष्ट किया है कि जुलाई के प्रारंभिक मसौदे में ‘चौथा रास्ता’ शामिल था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया और अगस्त में केंद्र सरकार को सौंपे गए अंतिम दस्तावेज में केवल तीन विकल्प रखे गए। भूटिया ने सिक्किम को इस प्रस्ताव में शामिल नहीं किए जाने संबंधी स्पष्टीकरण का स्वागत करते हुए कहा कि इस आश्वासन को दस्तावेजी प्रमाण के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार के नाम जारी सार्वजनिक अपील में उन्होंने इस मुद्दे पर आठ सवाल उठाए हैं। इनमें यह पूछा गया है कि चौथे विकल्प को मसौदे में शामिल करने की अनुमति किसने दी, इसे हटाने का निर्देश किसने और कब दिया तथा केंद्र सरकार को सौंपे गए अंतिम दस्तावेज का वास्तविक स्वरूप क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई लिखित दस्तावेज या आधिकारिक आश्वासन मौजूद है, जिसमें उत्तर बंगाल अथवा गोर्खालैंड से संबंधित किसी भी संभावित क्षेत्रीय व्यवस्था से सिक्किम को स्पष्ट रूप से अलग रखा गया हो।

साथ ही, भूटिया ने मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के रूप में प्रो. लामा की भूमिका का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की भी मांग की कि क्या सरकार को उक्त दस्तावेज तैयार किए जाने और बाद में चौथे विकल्प को हटाए जाने की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर बिना अनुमति के कोई कदम उठाया गया है, तो तथ्यों की जांच कर उचित कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।

सिब्लैक संयोजक ने सिक्किम में कथित अनियंत्रित प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर भी चिंता जताई। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता किसी विशेष समुदाय या भारतीय गोरखाओं की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के खिलाफ नहीं है। भूटिया ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और राज्य सरकार से सिक्किम विधानसभा में प्रस्ताव लाकर संविधान के अनुच्छेद 371एफ के तहत प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा के संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता दोहराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सिक्किम के क्षेत्रीय, संवैधानिक, जनसांख्यिकीय और रणनीतिक हितों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

सिब्लैक ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए राज्य सरकार से सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करने और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक समझे जाने पर माफी मांगने की भी अपील की।

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