आरएसएस को अस्तित्व साबित करने के लिए पंजीकरण की जरूरत नहीं: बीएल संतोष

बंगलूरू । RSS के पंजीकरण को लेकर कर्नाटक में सियासत गरमा गई है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस का पंजीकरण कराने की मांग की है। अब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने इसका जवाब दिया है। संतोष ने कहा कि आरएसएस को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए पंजीकरण की जरूरत नहीं है। संगठन लाखों लोगों के भरोसे से चलता है। संतोष शनिवार को बंगलूरू में हिन्दू जागरण वेदिके के ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में बोल रहे थे।

बीएल संतोष ने आगे कहा कि आरएसएस विभाजन के समय भी पंजीकृत नहीं था। आज भी उसका औपचारिक पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद संगठन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण से किसी संगठन का अस्तित्व तय नहीं होता। आरएसएस लाखों लोगों के भरोसे पर काम करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाजन के समय आरएसएस हिन्दुओं के साथ खड़ा था।

संतोष ने यह भी कहा कि भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली। इसके पीछे हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान था। उन्होंने कहा कि लाखों देशभक्त युवाओं और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाई थी। मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता वर्ष में उनके बलिदान को याद करना जरूरी है। संतोष ने कहा, आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी। अंग्रेजों ने बस यूं ही हमें आजादी नहीं दी।

बीएल संतोष ने दावा किया कि किसी क्षेत्र में हिन्दू आबादी घटने से भारत से जुड़ाव की भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि जहां हिन्दू आबादी घटती है, वहां ‘राष्ट्रविरोधी भावना’ पैदा होने लगती है। बंगलूरू की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो दशक से किसी भी राजनीतिक दल का हिन्दू उम्मीदवार वहां नहीं जीता है।

संतोष ने कहा, हिन्दुओं को बहुमत में इसलिए रहना चाहिए क्योंकि भारत को भारत ही रहना है।’ संतोष ने पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में बदलाव से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी आखिरकार देश के विभाजन तक पहुंची।

संतोष ने ‘अखंड भारत’ के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अविभाजित भारत का विचार कोई प्रशासनिक सपना नहीं है। यह सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे बीच जो सबसे बुजुर्ग हैं, वे अपने जीवनकाल में अखंड भारत को अपनी आंखों से देखें। संतोष ने इसे असंभव विचार मानने से इनकार किया। उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण और वियतनाम के एक होने का उदाहरण दिया।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष के उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान रजाकारों से खड़गे परिवार की रक्षा आरएसएस कार्यकर्ताओं ने की थी। प्रियांक खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके परिवार और उस क्षेत्र की जनता की रक्षा संघ ने नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना ने की थी।

यह विवाद बीएल संतोष के ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में दिए बयान के बाद शुरू हुआ। संतोष ने दावा किया था कि देश के विभाजन और रजाकारों की हिंसा के वक्त आरएसएस कार्यकर्ताओं ने रजाकारों का डटकर मुकाबला किया था और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार की रक्षा की थी। इस पर जवाब देते हुए प्रियांक खड़गे ने कहा कि सितंबर 1948 में हैदराबाद को भारत का हिस्सा बनाने के लिए ‘ऑपरेशन पोलो’ भारतीय सेना ने चलाया था, न कि संघ ने।

दूसरी ओर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने सरकारी संपत्ति से जुड़े नए विधेयक पर भाजपा के विरोध का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस बिल में किसी भी संगठन या पार्टी का नाम नहीं है। यह कानून सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का मकसद सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को सही तरीके से नियंत्रित करना है।

प्रियंक खड़गे ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल नियम के तहत ही होना चाहिए। किसी भी निजी कार्यक्रम के लिए अनुमति लेना जरूरी है, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना वजह इस बिल से डर रहा है और राजनीति कर रहा है।

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