बिना खून बहाए हुए बदलाव भारतीय लोकतंत्र की ताकत: अमित शाह

नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों ‘द बेंच, द बार, एंड द बिजार’ और ‘द लॉफुल एंड द ऑफुल’ के लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान अमित शाह ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की यात्रा और डिजिटल दौर में न्याय व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से भारत की बहुदलीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि 76 वर्षों की संवैधानिक यात्रा में भारत ने लोकतंत्र की जड़ों को बेहद गहराई तक पहुंचाया है। शाह ने इस बात पर जोर दिया कि देश में संसद और विधानसभा के जरिए हुए सत्ता परिवर्तन और कानूनों में बदलाव बिना एक बूंद खून बहाए स्वीकार किए गए, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा, 1947 से आज तक इस देश में संसद और विधानसभाओं के माध्यम से जितने भी परिवर्तन हुए, उन्हें बिना किसी हिंसा के स्वीकार किया गया। यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने तुषार मेहता की ओर से अपनी मां को किताब समर्पित करने को भावुक और प्रतीकात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि मदर्स डे के दिन किताब का लॉन्च होना बेहद खास है। शाह ने कहा, ‘भारत में तो हर दिन मदर्स डे होता है, लेकिन आज के दिन अपनी मां को किताब समर्पित करना बेहद सुंदर और भावनात्मक संदेश देता है।’

तुषार मेहता की इन दोनों किताबों को कानूनी और न्यायिक क्षेत्र में नई बहस की शुरुआत माना जा रहा है। खासकर एआई, तकनीक और न्यायपालिका के बदलते स्वरूप पर उठाए गए सवाल आने वाले समय में न्याय व्यवस्था और कानून के पेशे को नई दिशा दे सकते हैं। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ, न्यायपालिका से जुड़े लोग और गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।

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