‘क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं’, भारत ने चीन को दिया स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत को मिलाकर बना समूह क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के हित में विकास से जुड़े काम करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि क्वाड एक सहयोगात्मक मंच है, जिसका उद्देश्य व्यावहारिक पहलों के माध्यम से प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है। यह किसी के भी खिलाफ नहीं है। क्वाड ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कई पहलें की हैं। इसने कई अन्य क्षेत्रों में भी परियोजनाएं शुरू की हैं। भारत सरकार की ओर से ये टिप्पणियां चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग के उस बयान के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजिंग विशेष गुटों और गुटीय टकराव का विरोध करता है। देशों के बीच सहयोग भौगोलिक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए सहायक होना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

जायसवाल ने नॉर्वे की बहुराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी इक्विनोर के साथ दीर्घकालिक समझौते के तहत दीपक फर्टिलाइजर्स एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लि. को एलएनजी की पहली खेप मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा िक नॉर्वे के हैमरफेस्ट एलएनजी संयंत्र से प्राप्त यह खेप एक दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी की शुरुआत का प्रतीक है और इसे भारतीय उद्योग के लिए विश्वसनीय एलएनजी आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस बारे में पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा, ऊर्जा सुरक्षा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग आर्थिक सहयोग को मजबूत करने, सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शनिवार को चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचेंगे। उनका दौरा 30 मई से 2 जून तक चलेगा। राष्ट्रपति के रूप में मिन आंग ह्लाइंग का यह भारत का पहला दौरा है। उनके साथ कैबिनेट मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख व्यापारिक नेताओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा, सीमा सुरक्षा, संपर्क और अन्य मुद्दों के संबंध में, म्यांमार और भारत के बीच संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी।

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