देश के हर जिले में जन्म ले रहा है नया ‘जंतर-मंतर’: सौरव दास

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछने वाले शिक्षित युवाओं को नक्सली कहना उचित नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद अब अपने अंत के करीब है, लेकिन कुछ लोग ‘दिमागी नक्सल’ की सोच के साथ हिंसा और अशांति फैलाने के अवसर तलाशते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही।

प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि दिमागी नक्सल या जो भी नाम दिया जाए, यह नहीं चलेगा। शिक्षित युवाओं को केवल इसलिए नक्सली कैसे कहा जा सकता है क्योंकि वे सरकार से सवाल पूछते हैं? उन्होंने सरकार पर समस्याओं के समाधान में विफल रहने का आरोप भी लगाया। दास ने अपने पोस्ट में लिखा, घंटियां बज रही हैं। जागरण शुरू हो चुका है।

स्वतंत्रता दिवस के अलग संदेश में सौरव दास ने कहा कि 12 वर्षों बाद देश शायद ‘सच्चे अर्थों’ में स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, क्योंकि लोगों के भीतर का डर टूट रहा है। उन्होंने कहा कि जो पीढ़ी अब तक चुप रहने को मजबूर थी, उसे अब अपनी आवाज और मंच मिल गया है। दास के अनुसार, देश में शांतिपूर्ण विरोध और जागरूकता के नए दौर की शुरुआत हो रही है।

सौरव दास ने कहा कि देश के हर जिले में एक नया ‘जंतर-मंतर’ जन्म ले रहा है। यह वह जगह होगी, जहां निराश लोगों को उम्मीद और कमजोर लोगों को एकजुट होने की ताकत मिलेगी। उन्होंने सत्ता पक्ष पर युवाओं और जेन-जी को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। दास ने कहा कि इतिहास बताता है कि एकजुट जनता से अधिक शक्तिशाली कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा, वे बांटेंगे, हम जोड़ेंगे। वे डर फैलाएंगे, हम साहस फैलाएंगे। अब मन डर से मुक्त है और वापसी का रास्ता नहीं है।

Next Post

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics