‘विकसित सिक्किम-2047’ की ओर बढ़ रहा राज्य, पांच स्तंभों पर होगी विकास की नई इबारत : प्रेम सिंह तमांग

स्वतंत्रता दिवस संदेश में मुख्यमंत्री ने आर्थिक प्रगति, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और टिकाऊ विकास का रखा विजन

गंगटोक : 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्यवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के बलिदान को नमन किया है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की स्वतंत्रता असंख्य लोगों के साहस, त्याग और अटूट संकल्प का परिणाम है और आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह एकता, न्याय, समानता और राष्ट्र सेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाए। मुख्यमंत्री ने सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस और सभी सुरक्षा कर्मियों को भी सम्मान पूर्वक याद करते हुए कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण सिक्किम उनके समर्पण और बलिदान का विशेष महत्व समझता है।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि यह वर्ष सिक्किम के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि राज्य ने हाल ही में अपने राज्यत्व की स्वर्ण जयंती मनाई है। सिक्किम को भारतीय गणराज्य का 22वां राज्य बने पचास वर्ष पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यत्व ने सिक्किम में लोकतांत्रिक शासन, सामाजिक और आर्थिक विकास, संस्थागत मजबूती तथा लोगों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया, साथ ही राज्य की विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सिक्किम ने देश के प्रगतिशील राज्यों में अपनी पहचान बनाई है। पिछले आठ वर्षों के दौरान राज्य की वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद वृद्धि औसतन 12.6 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि सिक्किम आज देश में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों में शामिल है। वर्ष 2026-27 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद करीब 62,973 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि राज्य सरकार ने 19,215 करोड़ रुपये का कुल बजट पेश किया है।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि आने वाले वर्षों में सरकार पांच प्रमुख स्तंभों पर विकास को आगे बढ़ाएगी। इनमें उत्पादन आधारित क्षेत्रों को मजबूत करना, आधारभूत संरचना और संपर्क व्यवस्था में सुधार, मानव संसाधन में निवेश, पर्यावरण के साथ संतुलित विकास तथा योजनाबद्ध और टिकाऊ शहरीकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब उसका लाभ आम नागरिक के जीवन और आजीविका में स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

मुख्यमंत्री ने किसानों को राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि समय पर चुकाए गए किसान क्रेडिट कार्ड फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर को एक प्रतिशत तक कम करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इसके अलावा बड़ी इलायची के क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए “मेरो अलैंची, मेरो धन” अभियान के तहत वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और किसानों की सक्रिय भागीदारी को जोड़ा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ सिक्किम की पारंपरिक कृषि पहचान को मजबूत करना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। एसटीएनएम अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जिससे गंभीर किडनी रोगियों को राज्य के बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी। इसके अलावा राज्यव्यापी एचपीवी जांच अभियान शुरू कर सिक्किम को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समाप्त करने वाला अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

हेलेन लेप्चा सिक्किम सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने नामची में 500 बिस्तरों वाला जिला अस्पताल और मंगन में 100 बिस्तरों वाला जिला अस्पताल शुरू किया है। एसटीएनएम अस्पताल में न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी और हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा जैसी अति-विशिष्ट सेवाओं को भी जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने बताया कि एसटीएनएम अस्पताल में राज्य का पहला तृतीयक कैंसर उपचार केंद्र स्थापित किया गया है। नामची, गेजिंग, मंगन और जोरथांग में डायलिसिस केंद्र खोले गए हैं। राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। वर्ष 2025-26 में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 99.64 तक पहुंच गया, जबकि शिशु मृत्यु दर केवल 6 प्रति एक हजार जीवित जन्म दर्ज की गई।

वहीं, अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सरकार के विकास एजेंडे का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि 27 मई 2026 को सिक्किम उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य बना।

करीब चार हजार शिक्षकों और युवा स्वयंसेवकों के प्रयास से लगभग 15 हजार वयस्कों को साक्षर बनाया गया। उन्होंने कहा कि सिक्किम देश का पहला राज्य बना, जहां सभी सरकारी विद्यालयों में बालवाड़ी व्यवस्था लागू की गई। मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल के तहत असम लिंगजे में आवासीय विद्यालय संचालित किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा, आवास और समग्र विकास की सुविधाएं दी जा रही हैं। विद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कोडिंग, रोबोटिक्स, रॉकेट विज्ञान, व्यावसायिक शिक्षा, खेल और कला को पाठ्यक्रम से जोड़ा गया है।

सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा का सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शत-प्रतिशत विस्तार किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी विद्यालयों के दसवीं कक्षा के परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सीबीएसई दसवीं का उत्तीर्ण प्रतिशत वर्ष 2024 के 62 प्रतिशत से बढक़र 2026 में 84 प्रतिशत हो गया, जबकि सरकारी विद्यालयों में बारहवीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 90.84 दर्ज किया गया।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन को सिक्किम की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बताते हुए कहा कि यह राज्य की लगभग 18 प्रतिशत आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है। वर्तमान में सिक्किम में सालाना लगभग 17.2 लाख पर्यटक आते हैं। सरकार पर्यटन को टिकाऊ, समावेशी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा क्षेत्र बनाने पर काम कर रही है।

भालेढुंगा पर्यटन परियोजना के तहत 3.4 किलोमीटर लंबा रोपवे संचालित किया जा रहा है, जबकि ऊंचाई पर स्काईवॉक तैयार किया जा रहा है। पेलिंग रोपवे भी पर्यटकों के लिए शुरू हो चुका है। ऐतिहासिक सिंगशोर ब्रिज को कांच के अवलोकन मंच, जिपलाइन, बंजी जंपिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों के साथ विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण सिक्किम में एक हजार पारंपरिक होमस्टे विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अब 35 हजार से अधिक इकाइयां पंजीकृत हैं। कुशल युवा स्टार्टअप योजना के तहत चार हजार से अधिक ऋण दिए गए हैं, जबकि मुख्यमंत्री युवा उद्यमशीलता योजना के माध्यम से अच्छे व्यावसायिक विचारों को पांच लाख रुपये तक की प्रारंभिक सहायता दी जा रही है।

सिक्किम इंस्पायर्स कार्यक्रम के तहत वर्ष 2029 तक 3,00,500 महिलाओं और युवाओं को कौशल, रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की 19 युवतियां विशेष प्रशिक्षण के बाद जर्मनी में पंजीकृत नर्स के रूप में कार्यरत हैं। कई अन्य उम्मीदवार भी भाषा प्रशिक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया में हैं।

महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए आमा सशक्तिकरण योजना के तहत पात्र माताओं को सालाना 40 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। महिलाओं द्वारा संचालित आमा दीदी बहिनी पिंक बस सेवा को भी महिला सुरक्षा, सम्मान और रोजगार से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सिक्किम भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य है और कृषि तथा बागवानी आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार हैं। पिछले एक वर्ष में 62 लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण सब्जी पौधे वितरित किए गए, जिससे करीब 28 हजार किसानों को लाभ पहुंचा। सरकार बड़ी इलायची, डल्ले खुर्सानी और बेमौसमी सब्जियों की खेती के लिए बेहतर बाजार, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम के 47 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में वन हैं और राज्य देश की लगभग 26 प्रतिशत पुष्प जैव विविधता का घर है। “मेरो रुख, मेरो संतति” योजना के तहत प्रत्येक नवजात शिशु के जन्म पर 108 पेड़ लगाने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य का वन क्षेत्र वर्ष 2021 के 47.08 प्रतिशत से बढक़र 2023 में लगभग 47.33 प्रतिशत हो गया। उन्होंने खिचेयोपलरी झील को सिक्किम का पहला रामसर स्थल घोषित किए जाने, दुर्लभ रेड पांडा के संरक्षण, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बाघों की उपस्थिति तथा मंगन जिले में दुर्लभ मिश्मी टाकिन और यूरेशियन लिंक्स के दस्तावेजीकरण को राज्य की पर्यावरणीय उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम का विकास सरकार की उपलब्धि मात्र नहीं, बल्कि किसानों, श्रमिकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, डॉक्टरों, नर्सों, उद्यमियों, खिलाडिय़ों, कलाकारों, सरकारी कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और प्रत्येक नागरिक के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “विकसित सिक्किम-2047” का लक्ष्य एक ऐसे राज्य का निर्माण करना है, जहां हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवा, टिकाऊ रोजगार, आधुनिक आधारभूत संरचना और स्वच्छ पर्यावरण मिले।

मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से एकता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ “सुनहरे, समृद्ध और समर्थ सिक्किम” के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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