सोनम वांग्चुक के समर्थन में एसयूएसए की सभा आयोजित

गंगटोक : देश की राजधानी नई दिल्ली में अनशनरत शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांग्चुक के समर्थन में सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संघ (एसयूएसए) ने सोमवार को गंगटोक और यांगगांग परिसरों में शांतिपूर्ण एकजुटता सभा आयोजित की। इस दौरान छात्रों और शोधार्थियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समानता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। सभा में शामिल छात्रों ने दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवाओं के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया।

एसयूएसए ने अपने एक बयान में कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे लोगों के प्रयासों और संघर्षों के प्रति एकजुटता जताने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्र संघ ने कहा कि दोनों परिसरों में सभाएं पूरी तरह शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से संपन्न हुईं। इस दौरान, संघ ने लोकतांत्रिक मूल्यों, रचनात्मक संवाद और विद्यार्थियों के सामूहिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

इसी क्रम में गंगटोक जिला प्रशासनिक केंद्र के पास 15 से अधिक विधि छात्रों ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांग्चुक के प्रति समर्थन जताते हुए देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी व्यक्तिगत क्षमता में प्रदर्शन में शामिल हुए हैं और किसी कॉलेज, छात्र प्रतिनिधि परिषद या अन्य संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं। अपने प्रदर्शन में छात्रों ने ‘फेयर एग्जाम्स, फेयर फ्यूचर’, ‘आवर फ्यूचर, आवर रिस्पॉन्सिबिलिटी’ और ‘अकाउंटेबिलिटी इज नॉट ऑप्शनल’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां हाथों में ले रखी थीं। छात्रों ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़े मामले देशभर के विद्यार्थियों को प्रभावित करते हैं। सिक्किम के छात्र भी इन समस्याओं से अछूते नहीं हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के प्रबंधन पर चिंता जताते हुए परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय, अधिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था निष्पक्षता और समान अवसर पर आधारित होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने नीति-निर्माताओं से परीक्षा प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बहाल करने और प्रशासनिक चूक के कारण किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

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