एसआईआर प्रक्रिया में हैं कई खामियां : कोमल चामलिंग

एसडीएफ ने निर्वाचन आयोग से समय बढ़ाने की मांग की

गंगटोक : सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) प्रक्रिया के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए भारत निर्वाचन आयोग से मतदाता गणना कार्य की समयसीमा एक माह बढ़ाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जल्दबाजी में की जा रही इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार प्रभावित होने की आशंका है।

एसडीएफ की उपाध्यक्ष एवं चेली मोर्चा प्रभारी कोमल चामलिंग ने सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त समय, प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में एक मतदाता ने उन्हें दो समान एसआईआर फॉर्म दिखाए, जो बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) द्वारा घर पर छोड़ दिए गए थे, लेकिन उन्हें भरने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया गया था। एक अन्य फॉर्म में कई महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध होने के बावजूद खाली छोड़ दी गई थीं।

कोमल चामलिंग ने कहा कि राज्य में 4 लाख 71 हजार से अधिक मतदाताओं का सत्यापन किया जाना है, जबकि इसके लिए केवल 605 बीएलओ तैनात किए गए हैं। इस हिसाब से प्रत्येक बीएलओ के हिस्से औसतन 778 से अधिक मतदाता आते हैं। उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर सत्यापन करने, अनुपस्थित मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने और फॉर्म भरवाने जैसी जिम्मेदारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना व्यवहारिक रूप से कठिन है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में मतदाताओं को बिना किसी मार्गदर्शन के फॉर्म वितरित कर दिए गए हैं और उन्हें स्वयं भरकर जमा करने के लिए कहा गया है। इससे त्रुटियों की संभावना बढ़ गई है। एसडीएफ का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया में उपयोग किए जा रहे फॉर्म केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं, जबकि राज्य की बड़ी आबादी नेपाली भाषा में अधिक सहज है। पार्टी का मानना है कि यदि फॉर्म नेपाली भाषा में भी उपलब्ध कराए जाएं तो गलतियों की संख्या कम हो सकती है।

प्रेस विज्ञप्ति में बीएलओ के प्रशिक्षण को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। एसडीएफ ने दावा किया कि नामची जिले में 3 जून तक केवल 38.85 प्रतिशत बीएलओ को ही प्रशिक्षण दिया गया था। पार्टी का कहना है कि जब सत्यापन प्रक्रिया पहले से चल रही है, ऐसे में अधूरे प्रशिक्षण के साथ कार्य कर रहे अधिकारियों से त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है।

पार्टी ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को भी एक बड़ी चुनौती बताया है। एसडीएफ के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में घर एक-दूसरे से काफी दूर स्थित हैं और कई स्थानों पर अंतिम घर तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता है। इसके अलावा राज्य के बाहर रहने वाले छात्र, सशस्त्र बलों के जवान, नौकरीपेशा लोग तथा संघा निर्वाचन क्षेत्र के अनेक बौद्ध भिक्षु भी इस प्रक्रिया के दौरान आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकते, जिससे उनके नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

एसडीएफ ने कहा कि इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने 5 जून को भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर एसआईआर प्रक्रिया की समयसीमा एक माह बढ़ाने का अनुरोध किया है। पार्टी का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना प्रशासनिक समयसीमा पूरी करने से अधिक महत्वपूर्ण है।

कोमल चामलिंग ने कहा कि किसी भी वास्तविक मतदाता को प्रक्रियागत त्रुटियों, अपर्याप्त मार्गदर्शन या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उसके लोकतांत्रिक और संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से सिक्किम की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एसआईआर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समावेशी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

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