ऑड-ईवन व्यवस्था वापस लेना सरकार की विफलता की स्वीकारोक्ति : जिग्मी डी. भूटिया

गंगटोक : विपक्षी दल सिटिजन एक्‍शन पार्टी-सिक्किम (सीएपी) ने राज्य सरकार द्वारा लागू की गई ऑड-ईवन वाहन प्रतिबंध व्यवस्था को वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे सरकार की नीतिगत विफलता की स्वीकारोक्ति बताया है।

पार्टी के प्रेस एवं प्रचार परिषद के सचिव जिग्मी डी भूटिया की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन, जनपरामर्श अथवा प्रशासनिक तैयारी के पूरे राज्य में ऑड-ईवन व्यवस्था लागू कर दी थी, जिससे छात्रों, शिक्षकों, किसानों, छोटे व्यापारियों तथा आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

सीएपी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण और मितव्ययिता संबंधी अपील को राज्य सरकार ने जनहित के बजाय राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना दिया। पार्टी का कहना है कि उसने शुरू से ही चेतावनी दी थी कि इस तरह की व्यवस्था जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

विज्ञप्ति में मुख्यमंत्री की कार्यशैली की भी आलोचना करते हुए कहा गया कि जनता की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाया गया और उन्हें राजनीतिक व्यंग्य का विषय बनाया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही के प्रति उदासीनता बताया।

सीएपी ने यह भी आरोप लगाया कि ऑड-ईवन नियम के पालन में दोहरे मानदंड अपनाए गए। पार्टी के अनुसार आम नागरिकों से नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपेक्षा की गई, जबकि नीति का समर्थन करने वाले कुछ लोग स्वयं इसका पालन करते नहीं दिखे।

पार्टी ने दावा किया कि उसने इस मुद्दे को प्रेस वक्तव्यों, वीडियो संदेशों, सोशल मीडिया अभियानों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार उठाया। इसके अलावा 25 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को स्पीड पोस्ट के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया था।

सीएपी के अनुसार, जब सरकार ने जनअपीलों पर ध्यान नहीं दिया तो पार्टी प्रतिनिधियों ने 29 मई को सिक्किम उच्‍च न्‍यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की, जिस पर सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। पार्टी ने कहा कि ऑड-ईवन व्यवस्था की वापसी जनता के दबाव, लोकतांत्रिक प्रतिरोध और संवैधानिक जवाबदेही की जीत है। साथ ही यह संदेश भी है कि कोई भी सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर मनमाने निर्णय लंबे समय तक लागू नहीं रख सकती।

सीएपी ने इस नीति के विरोध में आवाज उठाने वाले नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी भविष्य में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और आम जनता के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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