गंगटोक : असम के गुवाहाटी में आगामी 12-13 जून को आयोजित होने वाले ‘एक्वाएक्स नॉर्थईस्ट 2026’ एक्सपो को लेकर आज यहां सिक्किम सरकार के मत्स्य विभाग के सभागार में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के विकास के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। यह एक्सपो राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और एक्वाएक्स इंडिया इवेंट्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
आज राज्य मत्स्य विभाग द्वारा एनएफडीबी और एक्वाएक्स इंडिया इवेंट्स के सहयोग से तथा प्रधान मत्स्य निदेशक केके श्रेष्ठ की अध्यक्षता में हुए इस संवाददाता सम्मेलन में उप निदेशक नितेश गुरुंग ने बताया कि ‘एक्वाएक्स नॉर्थईस्ट’ दरअसल ‘एक्वाएक्स इंडिया’ का एक विशेष संस्करण है, जिसे विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत और मछली उत्पादन की उच्च क्षमता वाले अन्य अंतर्देशीय राज्यों के ताजे पानी के मत्स्य पालन और जलीय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की सेवा के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन मछली किसानों, उद्यमियों, हैचरी संचालकों, चारा निर्माताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, बैंकों, बीमा कंपनियों, शोधकर्ताओं और सरकारी एजेंसियों को एक ही मंच पर लाएगा, ताकि मत्स्य क्षेत्र में उत्पादकता, लाभप्रदता और स्थिरता को गति दी जा सके।
वहीं, एनएफडीबी गवर्निंग बोर्ड सदस्य और एक्वाकल्चर उद्यमी अरूप शर्मा ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं मछली किसानों तक पहुंचे और साथ ही पूर्वोत्तर भर के जलीय कृषि उद्यमियों के लिए नेटवर्किंग और निवेश के अवसर भी पैदा हों। इसके अलावा, एनएफडीबी गवर्निंग बोर्ड सदस्य और एक्वाएक्स के पार्टनर रजनीश कुमार ने ‘एक्वाएक्स नॉर्थईस्ट 2026’ को एक्वाएक्स का 10वां संस्करण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों के माध्यम से देश की मछली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ‘विकसित भारत’ पहल के तहत वर्ष 2047 तक 400 लाख टन मछली उत्पादन का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में देश में प्रोटीन की कमी को दूर करने के साथ-साथ रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर पैदा करने की भी अपार क्षमता बतायी।
बताया गया कि इस प्रदर्शनी में उत्पादन एवं पालन प्रणाली, चारा एवं पोषण, स्वास्थ्य एवं जैव विविधता, प्रसंस्करण एवं कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार एवं वित्त पर खास पवेलियन होंगे। इसमें मछली पालन से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला के सभी हितधारकों के लिए आरएएस और बायोफ्लॉक सिस्टम, ऑटोमेटेड फीडर, बीमारियों की जांच करने वाली किट, ब्लास्ट फ्रीजर और एक्वाकल्चर फाइनेंस से जुड़े समाधान जैसी टेक्नोलॉजी दिखाई जाएंगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह एक्सपो ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के अनुरूप है जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए खरीदार-विक्रेता की मुलाकातों, नेटवर्किंग और निवेश के अवसरों के लिए एक मंच प्रदान करेगा। संवाददाता सम्मेलन में, सहायक मत्स्य निदेशक सुरेंद्र भंडारी ने इच्छुक मछली किसानों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने और इसके बारे में ज़्यादा जानकारी पाने के लिए अपने-अपने जिलों में मछली पालन विभाग से संपर्क करें।
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