‘ज्ञान भारतम मिशन’ को लेकर जिला स्तरीय स्थायी समिति की बैठक संपन्न

गेजिंग : केंद्र संस्कृति मंत्रालय की एक प्रमुख पहल ‘ज्ञान भारतम मिशन’ को लेकर आज यहां जिला कलेक्टर तेनजिंग डी डेनजोंग्पा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय स्थायी समिति की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जमीनी स्तर पर प्रभावी, समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु मिशन दिशानिर्देशों में बताए गए विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि किया जा सके।

बैठक की शुरुआत में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (मुख्यालय) सह डीएलएससी नोडल अधिकारी तृप्ति हांग्मा सुब्बा ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के उद्देश्यों और महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य राष्ट्र की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और बचाव करना है। वर्तमान में यह अपने प्रारंभिक चरण में है, जिसमें पांडुलिपियों की पहचान और सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने आगे अवगत कराया कि, मिशन के प्रावधानों के अनुसार सर्वेक्षण प्रक्रिया में पहचानी गई क्षतिग्रस्त पांडुलिपियों के संरक्षण पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से जारी किए गए दिशानिर्देशों और संदर्भ सामग्रियों से स्वयं को परिचित कराने का आग्रह किया।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर डेनजोंग्पा ने पांडुलिपियों में निहित समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा में इस मिशन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संरक्षकों के साथ बातचीत करते समय सटीकता, संवेदनशीलता और निर्धारित दिशानिर्देशों के कड़ाई से पालन पर उचित जोर देते हुए सर्वेक्षण गतिविधियों का सक्रिय समन्वय और समय पर निष्पादन सुनिश्चित करें। साथ ही, उन्होंने सक्रिय जनभागीदारी और सहयोग सुनिश्चित करने हेतु जमीनी स्तर पर व्यापक जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

वहीं, बैठक में शामिल बीडीओ को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर स्थित पांडुलिपि भंडारों की एक विस्तृत सूची तैयार कर जमा करें। इसमें मंदिर, मोनेस्ट्री, निजी ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक निकाय, साथ ही व्यक्तिगत संरक्षकों के पास रखी पांडुलिपियां शामिल होंगी।

इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को शुरू करने से पहले संबंधित संस्थानों और निजी संरक्षकों से पूर्व सहमति प्राप्त करना अनिवार्य है। सदन को यह भी सूचित किया गया कि केवल हस्तलिखित पांडुलिपियां ही इस मिशन के दायरे में आती हैं।

बैठक में जिला योजना अधिकारी पेम दोरजी भूटिया, गेजिंग बीडीओ गराप डी भूटिया, चोंगरांग बीडीओ गीता कुमारी गुरुंग, देंताम बीडीओ वोंगदी छिरिंग भूटिया, योक्‍सम बीडीओ एस लिम्बू और जिला सूचना अधिकारी कृष्ण सुब्बा ने भी भाग लिया। ये सभी जिला स्तरीय स्थायी समिति के सदस्य भी हैं।

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