गंगटोक : सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) पार्टी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित नहीं हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही, एसकेएम ने मांग की है कि यह अधिनियम 2029 के चुनाव से पहले लागू किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम के समर्थन में कल राजधानी में एक भव्य रैली निकाली गई थी।
समर्थन रैली की आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं सिक्किम विधानसभा की उपाध्यक्ष राजकुमारी थापा ने इसे महिलाओं के पक्ष में एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इसी समर्थन में राजधानी में रैली आयोजित की गई। उन्होंने रैली में भाग लेने के लिए राज्यभर से आई महिलाओं तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस रैली ने यह साबित कर दिया है कि सिक्किम की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सजग हैं।
दूसरी ओर, उपाध्यक्ष थापा ने संसद में दो दिनों तक चली चर्चा के बाद भी कल यह अधिनियम पारित नहीं होने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकता था, लेकिन कुछ विपक्षी दल महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में नहीं दिखे। उन्होंने 2029 से पहले इसे लागू करने की मांग दोहराई।
विधायक एवं आयोजन समिति की उपाध्यक्ष कला राई ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महिलाओं के पक्ष में निर्णय आएगा, लेकिन दुर्भाग्यवश यह अधिनियम पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि इससे सिक्किम की सभी महिलाएं आहत हैं और मांग की कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए।
इसी तरह, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जैकब खालिंग ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में एक सफल और प्रभावशाली रैली आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि इस रैली के माध्यम से सिक्किम देश की मुख्यधारा से जुड़ने में और मजबूत हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष द्वारा फैलाए गए भ्रम के कारण यह अधिनियम संसद में पारित नहीं हो सका और ऐसे प्रयासों की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि केवल स्थगित हुआ है, और निकट भविष्य में सभी राजनीतिक दलों को अपने मतभेद भुलाकर इसका समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भले ही यह अधिनियम कानूनी रूप से पारित नहीं हो सका हो, लेकिन एसकेएम सरकार महिलाओं को हर मंच और शासन में उचित स्थान देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए अवसरों को दोगुना करने की दिशा में काम करेगी।
वहीं, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव विकास बस्नेत ने संसद में इस अधिनियम के पारित न होने के लिए विपक्षी ‘इंडी गठबंधन’ को जिम्मेदार ठहराते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने 17 अप्रैल 2026 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद किए जाने की बात कही।
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