‘महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन का खेल’; गोगोई का सरकार पर आरोप

कहा- संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है विधेयक

नई दिल्ली । ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर संसद में तीन दिन के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। सत्र के पहले दिन लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित बिल पर चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संविधान संशोधन विधेयक को महिलाओं, जाति जनगणना, संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार परिसीमन को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

गौरव गोगोई ने लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्र के प्लान पर सवाल उठाए। उन्होंने दो टूक कहा, हम महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन परिसीमन से मुक्त करिए। महिला आरक्षण पर राजनीतिक रोटियां मत सेंकिये। उनका कहना था कि राजनीतिक लाभ के लिए देश में राजनीतिक संतुलन के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। गोगोई ने कहा कि यह शर्मनाक और दुखद है कि महिला आरक्षण का दुरुपयोग किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि सरकार को लोकसभा के वर्तमान संख्याबल 543 के आधार पर 2029 से ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए।

कांग्रेस नेता सवाल उठाए कि तीन साल में ऐसा क्या बदलाव हुआ कि सरकार का रुख बदल गया। गौरव गोगोई ने कहा, ‘गृह मंत्री ने 2023 में आश्चासन दिया था कि जनगणना होगी, परिसीमन होगा, महिला आरक्षण लागू होगा। अब कह रहे हैं कि जनगणना और परिसीमन होगा।’ उन्होंने दावा किया कि ‘लगता है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने में विलंब करना चाहती है। हम आज भी कह रहे हैं कि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ मत जोड़िए। 543 सीटों पर ही 2029 में लागू करिए।’

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गोगोई ने कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं है, यह पर्दे के पीछे परिसीमन कराने की राजनीतिक मंशा है। उनका कहना था कि अगर सरकार महिला आरक्षण के पक्ष में होती तो इसे तत्काल लागू करती। उन्होंने दावा किया कि सरकार को मजबूर होकर जाति जनगणना करानी पड़ी।

गौरव गोगोई ने सवाल किया कि सरकार ने कैसे निर्धारित किया कि लोकसभा सदस्यों की संख्या 815 करनी है? गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन को राजनीति हथियार के रूप में इस्तेमाल करनी चाहती है। हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने परिसीमन की व्यवस्था राजनीतिक हथियार के लिए नहीं की थी…लेकिन यह सरकार परिसीमन को निम्न स्तर की राजनीति के लिए इस्तेमाल कर रही है।

जम्मू-कश्मीर और असम में पिछले कुछ वर्षों में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार के लिए परिसीमन नागरिकों को सुविधा देने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता और राजनीतिक जड़ों को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि असम में एक लोकसभा का क्षेत्र 16 लाख तो एक 26 लाख की आबादी का है। यह किस की सुविधा के लिए किया गया है?

गौरव गोगोई ने दावा किया कि जो जम्मू-कश्मीर और असम में किया गया, वही देश में महिला आरक्षण के नाम पर करने का प्रयास हो रहा है। गौरव गोगोई ने कहा कि यह शर्मनाक और दुखद है कि महिला आरक्षण का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह शंका है कि आप महिला आरक्षण और जाति जनगणना के पक्ष में नहीं हो, आप संविधान को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विधेयक महिला विरोधी, जाति जनगणना विरोधी, संविधान विरोधी है तथा संघीय ढांचे के खिलाफ है।

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