नई दिल्ली । भारत में पेटेंट फाइल करने के मामले में एक नया रिकॉर्ड बना है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में नवाचार (इनोवेशन) और बौद्धिक संपदा के प्रति बढ़ती जागरूकता से यह मजबूती आई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि कुल आवेदनों में से लगभग 70 प्रतिशत यानी 99,721 आवेदन भारतीय निवासियों ने किए हैं। वहीं, विदेशी आवेदनों की संख्या 44,008 रही। यह देश में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक पेटेंट फाइलिंग है। सरकार का मानना है कि नीतिगत सुधारों, कम फीस और जागरूकता अभियानों की वजह से यह संभव हो पाया है।
सरकार ने स्टार्टअप्स, एमएसएमई और शिक्षण संस्थानों के लिए पेटेंट फाइलिंग फीस में 80 प्रतिशत की बड़ी छूट मिलती है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स, महिला आवेदकों और सरकारी संस्थानों के लिए आवेदनों की जांच प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। ‘राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन’ ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। ये वे श्रेणियां हैं जिनका औपचारिक आईपी फाइलिंग में ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व रहा है। इस मिशन के तहत देशभर में लगभग 9,500 कार्यक्रम हुए, जिनसे 25 लाख से ज्यादा छात्रों और शिक्षकों को जानकारी मिली।
आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों की ओर से पेटेंट फाइलिंग में पिछले पांच वर्षों में करीब 180 प्रतिशत का उछाल आया है। वित्त वर्ष 2020-21 में यह संख्या 24,326 थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 68,176 हो गई। इसके बाद वित्त वर्ष 2026 में इसमें और भी तेजी देखी गई है।
सरकार ने पेटेंट के नियमों को भी आसान बनाया है। अब जांच के लिए अनुरोध करने की समय सीमा 48 महीने से घटाकर 31 महीने कर दी गई है। साथ ही, पेटेंट एजेंटों के लिए इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। राज्यों की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु पेटेंट फाइल करने में सबसे आगे रहा। इसके बाद कर्नाटक और महाराष्ट्र का स्थान रहा। पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया। पीयूष गोयल ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब केवल मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र नहीं रहा, बल्कि अब यहां नए और उपयोगी विचारों का जन्म हो रहा है।
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