वॉशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने गुरुवार को कहा कि वह कहीं भी सैनिक भेजने पर विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह बात पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कही, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सैनिक भेजेंगे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से तेल और गैस क्षेत्रों पर हमले को लेकर बात की, तो ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसा न करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तालमेल है। लेकिन इस्राइल कभी-कभी अपने फैसले खुद लेता है और अगर उन्हें कुछ पसंद नहीं आता तो वह उसे रोकते हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि जापान के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध हैं और हाल के दिनों में जापान ने सहयोग बढ़ाया है। ईरान पर से प्रतिबंध हटाने और सैनिक भेजने के सवाल पर ट्रंप ने दोहराया कि वह कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह ऐसा करते भी, तो सार्वजनिक रूप से नहीं बताते।
उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि शेयर बाजार में तेजी आई है और अर्थव्यवस्था मजबूत है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की स्थिति को देखते हुए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, उन्हें उम्मीद थी कि इसके आर्थिक असर और ज्यादा होंगे।
ट्रंप ने कहा, यह कार्रवाई पूरी होने के बाद दुनिया ज्यादा सुरक्षित होगी। उन्होंने ईरान को दुनिया और पश्चिम एशिया के लिए एक गंभीर खतरा बताया और कहा कि इस बात से ज्यादातर देश सहमत हैं।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि जापान ईरान की गतिविधियों की निंदा करता है, खासकर पड़ोसी क्षेत्रों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित करने के लिए। उन्होंने कहा कि जापान ने ईरान से ऐसी गतिविधियां रोकने को कहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया में सुरक्षा स्थिति गंभीर होती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
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