गंगटोक : सिक्किम सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग की ओर से पशु चिकित्सा सेवा निदेशालय, कृषि भवन तादोंग के तत्वावधान में नव नियुक्त प्रोबेशनरी पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 18 मई से 30 मई 2026 तक कारफेक्टार स्थित पशुधन फार्म में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ फुर्बा लेप्चा, संयुक्त निदेशक, पशुधन फार्म, करफेक्टर के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण फार्म की विभिन्न इकाइयों, जिनमें मदर डेयरी फार्म, राज्य चारा बीज बैंक सह चारा भंडार, साराह फील्ड यूनिट तथा पोल्ट्री शामिल हैं, में आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण विभाग की क्षमता निर्माण पहल का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य नवनियुक्त पशु चिकित्सा अधिकारियों को पशुधन क्षेत्र में प्रभावी सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक और व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यापक और समग्र दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया, जिसमें सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों प्रकार के प्रशिक्षण को शामिल किया गया, ताकि अधिकारियों को राज्यभर में अपनी नियुक्ति संभालने से पूर्व आवश्यक पेशेवर दक्षता प्राप्त हो सके। प्रशिक्षण के दौरान आयोजित सैद्धांतिक सत्रों में प्रतिभागियों को पशुधन फार्म प्रबंधन, चारा एवं पोषण प्रबंधन, पशुओं के रोगों के नैदानिक मामलों के प्रबंधन, पशु कल्याण संबंधी मुद्दों, प्रशासनिक अभिलेखों एवं दस्तावेजों के रखरखाव तथा विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई। इन सत्रों के माध्यम से अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों की विविध जिम्मेदारियों और कार्यों की गहन समझ प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के व्यावहारिक भाग में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और क्षेत्रीय कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों को मवेशियों की रेक्टल जांच के माध्यम से प्रजनन तंत्र की विभिन्न अवस्थाओं, जैसे हीट एवं गर्भावस्था की पहचान का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त चारा एवं विषैले पौधों की पहचान, वैज्ञानिक चारा उत्पादन तकनीक, साइलेज निर्माण, पोल्ट्री फार्म प्रबंधन, कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक एवं उसमें होने वाली त्रुटियों की पहचान, तथा शल्य चिकित्सा किट की तैयारी एवं रखरखाव जैसे विषयों पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विभाग के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन के बाद सभी प्रोबेशनरी पशु चिकित्सा अधिकारी अब अपनी-अपनी तैनाती पर विभाग द्वारा सौंपे जाने वाले दायित्वों का निर्वहन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कहा कि वह मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी निरंतर पेशेवर विकास एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। इससे राज्य के किसानों और पशुपालकों को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
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