गंगटोक : हिमालयी राज्य सिक्किम ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए स्वयं को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने बुधवार को गंगटोक के मनन केंद्र में आयोजित सिक्किम विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह के दौरान उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत यह घोषणा की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिक्किम सरकार और राज्य की जनता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे सिक्किम के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि साक्षरता प्रगति और समावेशी विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने सरकार, संस्थानों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को संभव बनाया।
उल्लेखनीय है कि यह यह घोषणा एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आई है, जब सिक्किम अपने राज्य स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का साल भर चलने वाला उत्सव संपन्न कर रहा है।
शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी राज्य को पूर्ण साक्षर तब माना जाता है, जब 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो। सिक्किम में उल्लास कार्यक्रम के तहत साक्षरता दर 99.82 प्रतिशत दर्ज की गई है।
सिक्किम सरकार के ‘उन्नयन सर्वेक्षण 2022’ आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की कुल आबादी 5,30,046 है। सर्वेक्षण के दौरान 15,361 निरक्षर वयस्कों की पहचान की गई थी। इनमें से 14,447 वयस्कों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग द्वारा आयोजित एफएलएनएटी परीक्षा के माध्यम से साक्षर प्रमाणित किया गया। ऐसे में, चूंकि पहचाने गए लोगों में से केवल 914 लोग ही बिना प्रमाणित रह गए, इसलिए उल्लास फ्रेमवर्क के तहत कुल साक्षर आबादी 5,29,132 हो गई है। इस आधार पर, सिक्किम की साक्षरता दर 99.82 प्रतिशत आंकी गई है, जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘पूरी तरह साक्षर’ घोषित किए जाने के लिए तय किए गए 95 प्रतिशत के बेंचमार्क से काफी ज्यादा है।
गौरतलब है कि सिक्किम में उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत 14 नवंबर 2022 को मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने गंगटोक के चिंतन भवन से की थी। यह कार्यक्रम राज्य के सभी छह जिलों, 34 ब्लॉकों, 199 जीपीयू, 1,149 ग्राम पंचायत वार्डों और शहरी निकायों में लागू किया गया। इस अभियान में 4,000 से अधिक स्वयंसेवी शिक्षकों ने बिना मानदेय के निरक्षर वयस्कों को पढ़ाने में योगदान दिया, जो इस कार्यक्रम की सबसे खास विशेषताओं में से एक थी। इनमें स्कूल शिक्षक, कॉलेज विद्यार्थी, गैर-शिक्षण कर्मचारी और समुदाय के सदस्य शामिल रहे।
इस उपलब्धि के साथ सिक्किम अब मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें उल्लास कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है। राज्य की सभी जीपीयू, ग्राम पंचायत वार्डों, शहरी स्थानीय निकायों और नगर निगम प्राधिकरणों ने आधिकारिक तौर पर अपने-अपने क्षेत्रों को ‘पूर्ण साक्षर’ प्रमाणित किया है। इस घोषणा का सत्यापन जिला स्तर पर ‘मुख्य शिक्षा अधिकारियों’ के कार्यालयों के माध्यम से भी किया गया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, अब सिक्किम वयस्क शिक्षा के अगले चरण की ओर बढ़ेगा, जिसमें डिजिटल साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक शिक्षा, सतत शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभाग ने इसके लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, केंद्र सरकार, सिक्किम सरकार, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, राज्य नोडल अधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला एवं ब्लॉक नोडल अधिकारी, सहायक कर्मचारी, जिला कलेक्टर, पंचायती राज संस्थानों, शहरी स्थानीय निकाय और शिक्षार्थियों को इस कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है।
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