सिक्किम की महिलाएं बदलाव की नई पहचान : राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति ने सराहा सिक्किम का 'ऑर्गेनिक और एजुकेशन मॉडल'

गंगटोक : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को यहां मनन भवन में आयोजित सिक्किम विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह में सिक्किम को उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर बधाई दी। यह उपलब्धि 2027 के राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले हासिल की गई है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्य के पूर्ण साक्षर होने की घोषणा राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, शिक्षा मंत्री राजू बसनेत और कुलपति की उपस्थिति में की।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह उपलब्धि सिक्किम सरकार और राज्य की जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने साक्षरता को सशक्तिकरण और सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को विद्यार्थियों के जीवन का नया चरण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि लगभग 60 प्रतिशत स्नातक विद्यार्थी और करीब 70 प्रतिशत पदक प्राप्तकर्ता महिलाएं हैं। उन्होंने इसे शिक्षा आधारित महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बताया। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने सिक्किम में महिलाओं की विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की और कहा कि राज्य की महिलाएं चालक, ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार भूमिकाओं में सक्रिय हैं।

राष्ट्रपति ने सिक्किम को भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य बताते हुए पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए राज्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य ने भारत का पहला पूरी तरह से जैविक राज्य बनकर और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को सफलतापूर्वक बैलेंस करके देश के लिए एक मिसाल कायम की है।

वहीं, सिक्किम विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे क्षेत्र की भाषाओं, परंपराओं और पर्यावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने विश्वविद्यालय में लिम्बू, लेप्चा और भूटिया भाषाओं पर अध्ययन और शोध, हिमालयी पारिस्थितिकी, ग्लेशियर और जलवायु परिवर्तन पर किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने सिक्किम और उत्तर बंगाल की समाप्त हो रही भाषाओं और परंपराओं को बचाने के लिए विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर एंडेंजर्ड लैंग्वेजेज की स्थापना का भी स्वागत किया।

इसके अलावा, देश की पूरी तरक्की के लिए पूर्वोत्तर के विकास को जरूरी बताते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू ने विद्यार्थियों से इनोवेशन, सामाजिक जिम्मेदारी और मिलकर कोशिश करके देश के विकास में योगदान देने की अपील की।

कार्यक्रम में राज्यपाल और विश्वविद्यालय के चीफ रेक्टर ओम प्रकाश माथुर ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन का ज़िक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश के युवा एक आत्मनिर्भर, सबको साथ लेकर चलने वाला और विकसित भारत बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने हिमालय और सीमावर्ती इलाकों की जरूरतों को पूरा करते हुए जलवायु परिवर्तन, जैविक खेती, हिमालय के इकोसिस्टम, ग्लेशियर स्टडीज, इको-टूरिज्म, आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा पर रिसर्च करने के लिए सिक्किम यूनिवर्सिटी की तारीफ की।

वहीं, समारोह में मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने नए ग्रेजुएट विद्यार्थियों से जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। शिक्षा को बदलाव का सबसे ताकतवर जरिया बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ दया, ईमानदारी, अनुशासन, इनोवेशन और सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सिक्किम विश्वविद्यालय की प्रगति एवं विकास के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

आज के दीक्षांत समारोह में कुल 13,782 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 195 पीएचडी, 53 एमफिल, 2,441 स्नातकोत्तर और 11,093 स्नातक विद्यार्थी शामिल रहे। इसके अलावा 285 स्वर्ण और रजत पदक तथा 9 विशेष पदक प्रदान किए गए।

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