गंगटोक : सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे संस्करण का तीन दिवसीय आयोजन शुक्रवार को साहित्यिक चर्चाओं, कविताओं, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन रिज पार्क और व्हाइट मेमोरियल हॉल में विभिन्न सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लेखकों, कवियों, कलाकारों और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने विचार साझा किए।
रिज पार्क में दोपहर के भोजन के बाद का सत्र ‘एंटर प्रॉम्प्ट: द ग्रेट गेम ऑफ एआई’ विषय पर चर्चा के साथ शुरू हुआ। इसमें लेखक सैकत मजूमदार और बार्साली भट्टाचार्य ने संजय के. रॉय के साथ संवाद किया। चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, रचनात्मकता एवं कहानी कहने की कला पर इसके असर और तकनीक तथा मानवीय अभिव्यक्ति के बीच बदलते संबंधों पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके बाद ‘ए बॉर्डरलैंड स्टेट ऑफ माइंड’ शीर्षक से चर्चा आयोजित हुई। इसमें पत्रकार एवं लेखक अखिलेश उपाध्याय, लेखक पेमा वांगचुक दोरजी और सत्यदीप एस छेत्री ने पत्रकार एवं लेखिका अनुराधा शर्मा के साथ संवाद किया। इस सत्र में सीमावर्ती क्षेत्रों की अवधारणा, उनकी सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान तथा भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं के बीच जीवन से जुड़े अनुभवों और कहानियों पर चर्चा की गई।
अगले सत्र ‘कन्वर्सेशंस फॉर द माइंड’ में सचिन चितंबरन और सोनम ओंगमु लासोपा ने पुनीता रॉय के साथ संवाद किया। इसमें मानवीय मन से जुड़े विचारों और दृष्टिकोणों पर चर्चा करते हुए आत्मचिंतन तथा सार्थक विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच प्रदान किया गया।
‘द मेकिंग ऑफ ए चैंपियन’ सत्र में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज संध्या गुरूंग और सुकांत दास ने बिजॉय गुरूंग के साथ बातचीत की। इसमें खिलाड़ियों की यात्रा, अनुशासन, दृढ़ता और समर्पण के महत्व तथा एक सफल खिलाड़ी बनने में योगदान देने वाले अनुभवों पर प्रकाश डाला गया।
रिज पार्क में साहित्यिक कार्यक्रमों का समापन ‘कविता कॉन्सर्ट: बीट्स ऑफ पोएट्री’ के साथ हुआ। इसमें नेपाली कवि नवराज पराजुली ने अपनी प्रस्तुति दी, जबकि कवि प्रबिन खालिंग ने उनका परिचय कराया। इस प्रस्तुति में कविता और लय का सुंदर मेल देखने को मिला, जिसने साहित्यिक अभिव्यक्ति को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया।
इसी दौरान व्हाइट मेमोरियल हॉल में पुस्तकों के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गुरु टी लद्दाखी, चार्मी छेत्री, शुभ्रा सक्सेना और मारिया डेनजोंगपा की कृतियां प्रस्तुत की गईं। इस कार्यक्रम ने लेखकों की साहित्यिक रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने और नई पुस्तकों से परिचित कराने का अवसर प्रदान किया।
इसके बाद ‘ए वुमन्स वर्ल्ड’ शीर्षक से चर्चा हुई, जिसमें बार्साली भट्टाचार्य, मोना छेत्री, नेहा सिन्हा और शुभ्रा सक्सेना ने रोजी चामलिंग के साथ संवाद किया। चर्चा में साहित्य और कहानी कहने के माध्यम से महिलाओं के अनुभवों, दृष्टिकोणों और प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।
व्हाइट मेमोरियल हॉल में अंतिम सत्र ‘द पोएटिक इमेजिनेशन’ आयोजित हुआ। इसमें कवि देवांश संपांग राणा, ताशी छोपेल और सुबी ताबा ने अविनाम मंगर के साथ संवाद किया। सत्र में कविता को रचनात्मक अभिव्यक्ति, कल्पना और आत्मचिंतन के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। साथ ही क्षेत्र की विविध साहित्यिक परंपराओं और कवियों की अलग-अलग आवाजों पर भी चर्चा हुई।
महोत्सव का समापन कार्यक्रम नियजांग पाल्मू की प्रस्तुति के साथ शुरू हुआ। इसके बाद ‘साउंड ऑफ सोल्स एक्स गौरांश: नीरज आर्याज कबीर कैफे-इन कॉन्सर्ट’ ने तीन दिवसीय आयोजन को संगीतमय समापन प्रदान किया। इस तरह साहित्य, संगीत, कला और विचारों से सजा महोत्सव संपन्न हुआ।
महोत्सव के तहत 29 और 30 अक्टूबर को विभिन्न कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों को रचनात्मक गतिविधियों और कलात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ने का अवसर मिला। इनमें उजान दत्ता की ‘द स्टूडियो: इलस्ट्रेशंस वर्कशॉप’, चार्मी छेत्री की ‘इन द मोमेंट: एक्सप्लोरिंग बुद्धिस्ट/हिमालयन थिएटर एंड परफॉर्मेंस टेक्नीक्स’ तथा कार्तिकेय वशिष्ठ और मकरंद सानोन की ‘द लैंग्वेज ऑफ विंड एंड रिदम: एक्सप्लोरिंग द फाउंडेशंस ऑफ मेलोडी एंड पर्कशन’ कार्यशालाएं शामिल थीं।
इसके अतिरिक्त चेतन राज श्रेष्ठ ने ‘द क्राफ्ट ऑफ प्रोज: ए टू-सेशन राइटिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। माइंड मैटर्स की ओर से ‘डिजाइन योर बुक’ और ‘ए पोस्टकार्ड टू सिक्किम’ नामक संवादात्मक कला कार्यशालाएं आयोजित की गईं। पुनीता रॉय ने ‘फाइंडिंग मी: ए सर्च फॉर आइडेंटिटी, ए सर्च फॉर सेल्फ’ विषय पर एक्सप्रेसिव आर्ट्स कार्यशाला आयोजित की, जबकि मगदा खान और उनके समूह ने ‘रिदम्स ऑफ द थार: ए राजस्थानी म्यूजिक वर्कशॉप’ के माध्यम से प्रतिभागियों को राजस्थानी संगीत से परिचित कराया।
इन कार्यशालाओं में विभिन्न आयु वर्गों और रुचियों के लोगों ने भाग लिया। इनके माध्यम से रचनात्मकता, कलात्मक प्रयोग और विविध सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया।
तीन दिवसीय सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव में सिक्किम, हिमालयी क्षेत्र और देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, कवियों, कलाकारों, संगीतकारों, विचारकों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। महोत्सव ने सार्थक संवाद, रचनात्मक विचारों के आदान-प्रदान और विविध साहित्यिक एवं कलात्मक परंपराओं के उत्सव के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।
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