जैविक मत्स्य पालन बनेगा टिकाऊ आजीविका का जरिया : बिष्णु कुमार खतिवड़ा

पाकिम : राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के सहयोग से पाकिम जिला मत्स्य विभाग द्वारा गुरुवार को रोंगली स्थित कुमारी पेमा टी माध्यमिक विद्यालय में स्वस्थ पृथ्वी और समृद्ध भविष्य के लिए सतत जलीय कृषि को बढ़ावा विषय पर जैविक मत्स्य पालन संबंधी एक दिवसीय जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार बिष्णु कुमार खतिवड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के ओएसडी बुम छिरिंग योंजन, पंचायत अध्यक्ष मधुमाला गुरुंग, मत्स्य विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ कर्मा डोमा भूटिया तथा जिला मत्स्य विकास अधिकारी गौरी मुखिया भी मौजूद थीं।

मुख्य अतिथि Bishnu Kumar Khatiwada ने मत्स्य विभाग द्वारा कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए जैविक मत्स्य पालन को टिकाऊ आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने युवाओं से मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मत्स्य पालन पद्धतियों के विकास के साथ यह क्षेत्र स्वरोजगार, आय सृजन और ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए सतत जलीय कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में मत्स्य विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ कर्मा डोमा भूटिया ने जैविक मत्स्य पालन पर तकनीकी सत्र का संचालन किया। उन्होंने जैविक जलीय कृषि के सिद्धांतों और महत्व की विस्तार से जानकारी देते हुए स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त जल स्रोतों के संरक्षण, मछलियों की प्राकृतिक गतिविधियों के अनुरूप उचित घनत्व बनाए रखने तथा पर्यावरण अनुकूल मत्स्य पालन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन, रोगों की रोकथाम, पशु चिकित्सा दवाओं एवं एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग तथा जैविक मानकों के अनुरूप फसल कटाई से पूर्व अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि के महत्व की भी जानकारी दी। उन्होंने सिक्किम में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति और मत्स्य क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को मत्स्य विज्ञान, जलीय कृषि, अनुसंधान तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों से भी अवगत कराया।

जिला मत्स्य विकास अधिकारी गौरी मुखिया ने सिक्किम की रेनबो ट्राउट मछली पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने इसके सामान्य गुण, जीवनकाल, भोजन की आदतों, प्रजनन प्रक्रिया तथा पालन तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही मछली के पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभ, मछलियों के श्वसन तंत्र तथा संवेदी अंगों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने ग्रास कार्प, सिंघी, कैटफिश तथा सजावटी मछलियों सहित विभिन्न प्रजातियों की विशेषताओं और महत्व की जानकारी दी। इसके अलावा सिक्किम में पाई जाने वाली स्वदेशी मछली प्रजातियों, राज्य की समृद्ध मत्स्य जैव विविधता तथा जल प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, विनाशकारी मत्स्य आखेट और प्राकृतिक आवासों के क्षरण जैसे जलीय जैव विविधता के प्रमुख खतरों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि ने भारत सरकार के मत्स्य विभाग तथा सिक्किम सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत रोराथांग, रेनॉक और रोंग्ली में स्थापित फिश कियोस्क का उद्घाटन किया। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत संचालित इस उप-योजना के माध्यम से ताजी एवं सजावटी मछलियों की बिक्री के लिए आधुनिक और स्वच्छ बिक्री केंद्र स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिससे मत्स्य पालन और सतत जलीय कृषि के प्रति उनकी सहभागिता और जागरूकता को बढ़ावा मिला। इस अवसर पर मत्स्य विभाग के अधिकारी, प्रगतिशील मत्स्य पालक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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